बुध अगहन २७, २०७४ | थारु संम्वद २६४१

• हेरैति रहल रीतिसंस्कृति संरक्षण ओ संबद्र्धनके लग ।

• थारु हुक्रनके उत्पत्ति, उत्थान इतिहासके बारेम विश्वव्यापी रुपमे जानकारी कराइक लग ।

• थारु हुक्रनके दैनिक गतिविधि, घटना, विचारहे सामाचारके रुपमे बाहेर नानेक लग ।

• छिट्कल अवस्थाम रहल, थारु गितबास, नाच कोर, हस्तकला, खेलकुद, ओ थारुनके जिवन प्रक्रिया सम्बन्धित सक्कुचिज हे सिमोटके एक ठा“उमे केन्द्रिकृत कराइक लग ।

• तमान बुद्धिजिवि हुक्रनके लेख, रचना ओ विचार हे विश्लेषण करति, वास्तविक सत्य तथ्य पत्ता लगाइक लग ।

• आधुनिक प्रविधि, प्रणाली ओ विकास संगे थारु हुक्रनके गोरा आघे बर्हाइक लग ।

• थारु हुक्रनके सिप जा“गर से बनाइल हस्तकला हे बजारीकरण ओ विश्वव्यापी रुपमे व्यवसायीकरण करेक लग ।