लघुकथा (सब्के मालिक एक्केहो)

खिस्सा / बट्कुही १७ फाल्गुन २०७७, सोमबार Hits : 141
लघुकथा (सब्के मालिक एक्केहो)

समय ओ परिस्थिति अनुसार ई धर्तिमे बसेरालेना मानव फे आपन आपन गति अनुसार बदल्ती बातैँ। आज  ओस्तहिँ एक्थो विषय लैके आज लघु कथा लिखतुँ ।

लाछु डंगौरा थारु प्यासी (कैलाली)

राकेस ओ विशाल संगे पढ्ना मिल्ना संघरिया रथैं। एक्के गाउँक हुईलेक ओर्से संगे शिशु ठन्से पढ्ति मावि तहमे पुग्सेकल रथैं। एकदिन राकेस विशालहे कहत। विशाल काल्हिक दिनतो सनिच्चरहो काल कोहोरुँ घुमे जाईन तै ओ मै संगे? ओस्ते फे हमार दुनु जाने संगे घुम्लेक फे धेरेदिन हुईगिल्बा। कत्रा घरेकिल रहिके गोरु भैंसिन पल्नाहो। अब्तो भारी भारी हुईगिल्बाती जे बाहेरके फेतो चहल पहल बुझ्ना सिख्ना हम्रन ओत्रै जरुरिबा जत्राकी हम्रन पढ्ना जरुरत बा। विशाल टुटुवार मुह कैले राकेसके बात ओरैलेक बराबेर पाछे अन्कनाई हस कर्ती मुह खोलत। हुईनातो टैं बरामजा बात कर्ले राकेस हम्रे ई उमेरमे नाई नेगब घुमब तो कब घुमब ओ आउर बात सिखब। तहिँ कहते कलेसे चोल्तो काल्हिक दिन हम्रे दुनु जाने घुम्हिँ जाब तर कहाँ जैनाहो घुमे अब तहिँ बतान ?

Picture: Tikapur Park

राकेस हँसेहस कर्ती मुह चुम्रती  तनिक उँच स्वरमे खुसिक झारे फोँहैंती। अरे तै का चिन्ता करते मै बातुँ जे……काल्हिक दिन आउर कहुँनाई लाग्गे फे ओ शुन्दर फे टिकापुर पार्क तैं ओ मै संगे घुमे जाब। ओहाँ हरियर बनुवाक भित्तर नुकल सुन्दर फुलरिया ओ पहिलेक हमार देशके राजनके बन्वाईल सुघुर सुन्दर…. घरबा। उ हेरे बहुत मनै जम्मा हुईल रथैं। ओक्रे पाछे कर्णाली लदियामे आपन सुस्कारलेले फतिक पानी फे बहती रहत…। अत्रा बेरसम राकेसके बातेमे ध्यान धर्ले विशाल मुह बैले सुन्ती रहल पाछे हौसल्ले कहत ठिके बा। ले काल ओहरी जाब घुमघाम करे। दोसर दिन बिहान खनापिना खाके  दुनु संघरियन घरेसे नेंग जैथैँ।

दुनु जाने हँसी खुसिक  बात बतुवाईती बयालके मच्धारहे छल्ती भर्खरिक जामल दिन्के अनारी घाम्के मजालेती जैनै क्रममे दुनु जाने अस्नेरी कना ठाउँमे पुग्जैथैं तबहिं राकेस अरे विशाल महिन बरा प्यास लाग्ता चोल अत्थे पानी पिलि तब जाब। अब पुग्चुक्ली नाईहो दुर। विशाल ले ले ठिकेबा चोल पानी पिलितो जाब। दुनु जाने पकर्या रुखुवाक तरे बोम्मामे पानी पिके उहे चौतारीमे नम्मा नम्मा साँस तन्ती बिसैँना निहुँ लैके बैठजैथैँ। आँजर पाँजर जुर जुर बयालके ग्रहण कर्ती दुईचार जाने बुढाईल मनै उहे

चौतारिमे सुतल रथैँ। साईत ओईने उ तन्तलापुर घामेमे रुखुवाक सित्तर जुर कानु पाके छोट लर्काहस निदा सेकल रथैँ। कोई आँखी तुम्ले फुस फुस सास लेहेत फँकाईत तो कोई खतियक मचुवा खरिडेहस नाक बोलाईत। ई सब सुन्के दुनु जाने हंस्थैं। ईहे बखत विशालके आँखी उहे रुखुवामे ताँसल छोट्मोट पानामे परजैथिस।

विशाल उ देख्के तनिक लग्गे सरक्के घुरे लागत। जेम्ना छोट्मोट शंकर भगुवानके फोटो संगे भन्दारा खैना सुचना लिखल रहत। मने मने विशाल दण्डवात कर्ती सुचना पढेलागत। ई देख्के काहो कहिके राकेस तनिक लग्गे जाके तनिक बेर हेरके उहे फोटोमे पच्से थुई…… कहती थुकदेहेत। राकेसके अईसिन कर्मना देख्के विशालके मनेम भारी चोट पुग्थिस। जिहिन उ सेवा लाग्ले रहत उहिने आपन संघरियाई थुक्के घृणा अपमान करत देखत। कबुनै राकेसके पर रिसैना विशाल उबेर रिसलैके तप्ती तभु नरम स्वर कराके राकेससे पुँछत। राकेस तैं काकरे ई भगुवानके फोटोमे थुक्ले? का बिगार  कर्लेबा ई फोटो? तुहिन का नाई मनपरल हँ तै एम्ना थुक्के अपमान कैले? विशालके बात सुन्के राकेस भलाही खाई  हस कर्के दोसर ओर मुह घुमाके हँसेहस कर्ती। अरे मै ई केहो काहो नाई चिहिन्थुँ ई तोर भगुवान हुई मनो मोरलक कुछु नाईहो। महिन अईसिन तोर भगुवाननके कुछु मन नाई परत ओ मै एन नाई मन्थुँ।।

राकेसके ई बकल बात सुन्के विशालके मुटुमे बर्ती आगिम घिउ दारल हस हुई जैथिस। विशाल आपन हाँथे लैके सम्मान पुर्वक राकेसके थुकल उ फोटोमनिक थुक पोँछ्ती कहत। राकेस तै बराभारी भुल कर्ले आज आपन धर्म  बदल्के। तुहिन यादहुई राकेस जब हम्रे दुनु जाने छोट छोट रहितो श्री भानुभक्त राष्ट्रिय प्राथमिक विद्दयालय खकरौलामे पढेबरिक बात। जब तैं फे हरसाल हमारसंग स्कुलके अंग्नामे लाईन्मे थर्हियाके हाँथेम गेँडक फुलालेले सरस्वती माताकी जैहो जैहो कर्ती फुला चिँथ चिँथ छित्लेक।

हो तैं आज हिन्दु धर्म छोर्के दोसर धर्मलेले। मै खुसी बातुँ हरेक मनैन्के अधिकारहो ई । तर राकेस चहा जौन धर्मके ईतिहास बिल्ताके हेर तैं। चोराके खाउ, ठाग्के खाउ, केक्रो अपमान करो, झैझगदा करो, कहिके कोनो धर्मके ईतिहासमे नाईलिखल भेटैबे। सब धर्म मजै सिखाईत। तै ई फोटो मनिक भगुवानहे नाई मनपरैथेतो तुहिन नाई हेर्ना रहे नाई थुक्ना रहे। राकेस जेकर सम्मान नाई करे सेक्लेसे अपमान फे नाई करे परत। तैं नाई मन्लेसे फे मैतो मन्थुँ। तैँ दोसर धर्म लेलेसे फे मैतो उहे हिन्दुहुँ अब मोरोपर फे थुक्दे राकेस थुक्दे।

चाहे अल्लाह कहिके बोल्कारो चाहे भगुवान कहिके बोल्कारो सब्के मालिक एकहो हमार उहिन सम्मान सम्बोधन कर्ना तरिका किल फरकबा। राकेस आपन आँखिमन्से आँसेक धेक्री झरैती विशालहे उँकुवारमे भर्ती कहत महिन माफ कर्दे विशाल मै आज तोर मन दुखैनु। आज तै मोर आँखी खोल्देले विशाल।।

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