राजा विर विक्रमाके जित

खिस्सा / बट्कुही १७ फाल्गुन २०७७, सोमबार Hits : 170
राजा विर विक्रमाके जित

- दुर्जन चाैधरी

( पहुरा थारू दैनिक )

एकठो देशमे राजा आउर रानी रहित । राजाके नाउँ विर विक्रमा रठिस । राजा एकदम मिलनसार, न्याय करना, सक्कुहुन सुखी देख्ना चाहना, जनतनके बात बुझ्ना, सक्कुहुन बराबर मन्नाके साथ–साथे एकदम दयालु फे रहित । राजा विर विक्रमाके घरमे काम करुइया एकठो नोकर रहठ । नोकर बाभन जातके रहत । नोकर आपन गोसिन्याहे फे आपन सँगे काम कराइठ । राजा नोकरहे नोकर नै कैहके बभना कैहके बोलठ । बभना बभनिन्या दिनभर काम करके सन्झ्या जून आपन झोप्रीमे सुते चल जैठै । झोप्री राजाके महलसे खासै दुर नै रठिन । अस्तके बभना राजा विर विक्रमाके घर काम करटि जाइठ । बहुट धेर दिन काम करट–करट होजिठिन । एक दिन बेरी जुन राजा आउर रानी सल्लाह करठै ।बभना हमार घर अत्ना ढेर दिनसे काम करता । इने हमार नोन खाके कैसिक पचैहि कहिके राजा रानी सल्लाह करके बभ्नाहे तिरठ पठैना सल्लाह बनैठै ।

विहानके राजा बभनाहे बलाके कहठ– भैया बभना टै हमार घर बहुट दिन काम करसेक्ले टै हमार नोन कैसिक पचैबे । हमरे एकठो सल्लाह करले बटी कि टुहि टिरठ पठैना कैहके ।

टब बभना कहठ–राजा जी अपने जैसिन सोच्ले हुइबी बहृयै सोच्ले हुइबी कहिके कहठ । बभनिन्या मोर गोस्या टिरठ जाइटै कहिके पटा पाइठ आउर आपन गोस्याहे कहठ–टु टिरठ चल जैबो टे मै यहाँ अक्केली कैसिक रहम, केकर सहारामे जियम, किही हेरके चिट बुझैम ।

टब बभना कहठ–मै फोटु खिचाके भितामे टाँसके चलजैम । टै वहे फोटु हेरके रहिस । रेखदेख करुइया राजा रानी पला बटै कहिके बभना टिरठ चल देहठ ।

कुछ दिन रैहके बभनक झोप्रीम आगी लाग जैठिस ।

बभनिन्या चिल्लाइ लागठ । बचाउ–बचाउ मोर बभना जरे लग्नै बचाउ कैहके गोहराइठ । ¬(लग्गे कोइ नै रठै बभनिँन्या बभनै भित्तर लेहे जाइठ ) बभनिन्या आगीमे परके दहे लागठ । बभनिन्यक देह पूरा जरजिठिस । राजा रानी बभनिन्याहे जाके बचैठै आउर खोब ब¥िहयाके सुता देठै । टब राजा विर विक्रमा रानीहे कहठ – बभना टिरठ गैल बावइ । ऊ आइ टे हम्रे उहि का जवाफ देब कैहके । राजा विर विक्रमा दवाइके खोजीमे चल देहेठ । राजा दवाइके खोजीमे जाइट–जाइट बहुट दुर पुग्जाइठ । कहु दवाइ नै पाइठ । दवाइ खोज्टी–खोज्टी एकठो गाउँमे रात हुजैठिस । टब एकठो घरम जाके राजा विर विक्रमा मौसी कना नात लेगाके बोलठ– मौसी रामराम घरक बु¥हया कहट– रामराम भैया । मै चिनेह नै सेक्ठु भैया । टै केकर छावा हुइटे ? राजा विर विक्रमा कहट कि मै फलानेक छावा हुइटु । मौसी मोर रात हुगैल । मै रात आज यहै बैठम । टब मौसी कठिस – ठिक बाटे भैया बैठले । (राजा घरक बारेम पुछे लागठ –मौसी सक्कु जनहन देखटु टोर पटोहियाहेफे देखटु । टोर छावाहे नै देख्ठु कहाँ गैलबा ? टब मौसी कठिस – छावा भोज करके सेक्टीकिल राजा करनके घर चौकिदार करे गैल बा । का करबे भैया गरीब मनैनके अस्टे टे हो । कबु का करलक रुप्या टिरना रहट टे कबु का करलक । राजा विर विक्रमा कहठ – मौसी मै टोर छावाहे छुटैम आउर घरे पठैम । (रात बितत विहान हुइठिन । खाना खा पिके राजा विर विक्रमा राजा करनके घर चल परठै । राजा करनके घर पुग्के ।) राजा विर विक्रमा पुछठै – यहाँके दरबान (चौकिदार) के हो ? यहाँ पठाउँ । (मौसिक छावा खबर पाके राजा विर विक्रमाके ठन आइत ओ कहत–के बलाइल महिन ।¬¬) राजा विर विक्रमा जवाफ देठै – मै बलैले रहुँ । फेनसे लौण्डा कहठ – अपने के हुइटी । मै अपनेहे नै चिन्ठु । काहे बलैली कुछ बाटे बटाइ । राजा विर विक्रमा कहठ – मै विर विक्रमा हुइटु । मै अपनेक घरसे आइल बटु । अपने भोज करके सेक्टिकिल काहे आगिली काम करे ? लौण्डा फेनसे कहट – मोरटे यहे कामे होवइ । काम पकरल मनै नै अइलेसे फेन नै बन्ना । टब मारे आइ परल । टब राजा विर विक्रमा कहट – भैया आपन घर टै जा मै यहाँ टोरिक सट्टामे काम करदेम । लौण्डा कहट – मै यहाँ दरबानके काम करठुँ । यहै रबि, मजासे काम करबी । लि टे मै आपन घर जाइटु कैहके लौण्डा चल जाइट । घर पुगट टे वहाँ आपन सट्टामे दोसुर जहन छावा बनल देखट । ऊ लौण्डा पुग्नासे पहिले भुतप्रेत छावा बन्के बैठल रठिन । ऊ लौण्डा कहट – टुहिनके खास छावा मै हुँ । भूतप्रेत आउर खास छावाके खोब सून टकर – पकर हुइठिन । दरबान बन्के गैल लौण्डाहे टै हमार छावा नै हुइटे कैहके नै स्वीकर करठिस । टब लौण्डा कहट – टोहरे महिन छावा नै स्वीकर करबो टे मै टुहिनके घरके नोकर बन्के बैठल रहम । (छावा नै बनाके ऊ लौण्डाहे आपन खास छावाहे घरक नोकर बना लेठै ।) वहाँ राजा विर विक्रमा ड्युटी (काम¬) मे लगल रहठ । राजा विर विक्रमा रोज दिन राजा करनहे राजमहल मनसे रात १२ बजे बाहेर जाइट देखट । (अस्टे बाहेर जाइट देखट–देखट राजा एक दिन चिमा लागठ ।) रातके १२ बजत । राजा करन रोज दिन जस्टे ऊ दिन फेन जाइ लग्ठै । राजा विर विक्रमा नुकट छिपट पाछे –पाछे चल परठै । राजा करन परीनके बयिगम पुग्ठै । ढिरे – ढिरे राजा विर विक्रमा फेन बयिगम पुग्ठै ।

राजा करन वहाँ पुग्के चुलाह बनैठै । चुलाह बनाके कराही बैठैठै । कराही बैठाके आगी सुगैँठै । आगी सुँगाके कराहिक पानी ढिकैठै । राजा करन आपन देह चक्कुसे चिरके आपन पिसके नानल मसाला आपन देहमे भरके ढिकल कराहिक पानीम कुद जाइठ । ढिकल पानीम कुदके पाके लागठ । पाकके सेकट । बगियक परी अइठै राजा करनहे खाइ लग्ठै । जस्ते परी खैठै वस्ते निखरल हड्डी जोरल करठै । हातके हड्डी हातमे, गोरक हड्डी गोरमे जोरटी जिठै । अस्ते करटी पूरा मनै खैटी जोरटी हड्डीके किल बनाके खाके सेक्के परीहुक्रे हड्डीमे इमरट बुन्डिया छिरिकके राजा करनहे फेनसे जिँन्दा करदेठै । राजा करन फेनसे पहिलेक जस्ते हुजिठै । परीहुक्रे खैलक बदला राजा करनहे झनझन ठैली हिलाके सोनक टका (सोनक रुप्या) राजा करनहे दैदेठै । राजा करन झनझन ठैली लेके चल देहठ ।

यी सक्कु नजारा राजा विर विक्रमा देख्टी रहठ । हेरके सेक्के राजा विर विक्रमा राजा करनसे आगे राजमहल पुग्जाइठ । विहान हुइठ । राजा करनके घर पैसा लेहेक लाग कमुइयन लाइन लाग जिठै । राजा सब जनहन पैसा देहेठ ओ पठादेहेट । राजा विर विक्रमा सोचत यी कामसे राजा करनहे मै छुट्कारा दिलैम । एक दिन विर विक्रमा राजा करनहे कहट – राजाजी आज मै बजार जैना सोच बनैले बटु , जाइ देबि कि नै ? राजा करन जवाफ देठै – बजार जाइक लाग बटे टे जा भैया, टै बजार घुम्या बजार हेरया । राजा विर विक्रमा बजार चल देठै । बजार जाके नोन, तेल, बेसार, मसाला किन्ठै । किन्के खोब मजासे मसाला पिस्ठै । मसाला पिसके बनाके लेले चल देठै राज महलमे । राजमहल पुग्के ड्युटी लग्ठै । ऊ रात विर विक्रमा राजा करनकेमे निन्द्री दारके परीनके बगियम चल देठै । परीनके बगियम पुग्के राजा करनके जस्ते जम्मा काम करके देहमे मसाला भरके कराहीमे बैठ जाइठ । जब विर विक्रमा पाक जाइठ । तब परी निकरजिठै खाइक लग । परी हड्डी निखार–निखार खैठै ओ बटवाइ लग्ठै । अत्रा दिन शिकार खैली आझिक दिन बराबर मिठ शिकार कबु नाइ खैले रहि । कनि केकर शिकार हो कहिके बत्वैठै । खाके सेकठै । जम्मा हड्डी जोरठै ओ इमरत बुन्डिया छिरिक देठै । इमरत बुन्डिया छिरकटी कि राजा विर विक्रमा जि जिठै । परी सोनक टका देठै । राजा विर विक्रमा लेना मना करट ओ कहठ – महिन सोनक टका नाइ चाहिँ । महिन झनझन ठैली आउर इमरत बुन्डिया चाहिँ । परी देना तयार हुजैठै । राजा विर विक्रमा एक बात आउर कहठ – आजसे इ कराही नाइ बैठ्ना चाहिँ । आज मै इ कराही बेग्के चल जैम । परी इ बातमे फेनसे मान जिठै । कराही बेग देहठ । ( विर विक्रमा इमरत बुन्डिया ओ झनझन ठैली लेके चल देहट । ) विर विक्रमा राजमहल पुगठ ओ ड्युटीमे लाग जाइठ । रोज जस्ते विहान हुइठ । निन्द्री दरलक वरसे राजा करन नाइ उठल रठै । मस्त निँदमे सुतल रठै । रानी सोच्ठै – आज टे विहान हुगैल राजा अभिन टक नाइ उठल हुइत । अ‍ैसे दिन टे जल्दि उठ्के लाहा खोरके टका बाँटे लागिट । ( रानी राजा करनहे उठैठै ।) राजा उठ्के हात मुह ढोइठै । राजमहलमे काम करुइया टका लेहेक लाग लाइन लागल रठै । ऊ दिन राजा बरा चिन्तामे रठै । सोच्ठै बहुत बेकार हुइल बरा दिन ढक सुत्के । राजा कठै काम करुइयनहे – आज मोर ठन कुछ नाइ हो टुहिन हे देना । मै टुहिनहे का दिउँ । बरु दोसुर दिन अइहो । टब विर विक्रमा कहठ –राजा जी मै टका दिउँ । राजा करन कठै – बावइ टे दे । विर विक्रमा कहठ –लि इ झनझन ठैली जस्ते हिलैबी वस्ते अपनेक चाहल अनुसार टका गिरी टब बाँटल करबी आपन काम करुइयनहे , जनतनहे । ( राजा करन सक्कु जनहन कहल अनुसार झनझन ठैली हिलाके टका बट्ठै । पैसा बाँटके सब जहान घरे पठैठै । ) राजा करन विर विक्रमाहे पुछे लग्ठै – टै अत्ना टका पैले कहाँसे ?विर वि क्रमा कहठ – मै इ झनझन ठैली परीन ठनसे नन्नु । टब शुरुसे अन्तिम टक कहानी बटाइट ओ कहट – राजाजी आब अपनेहे कबु नाइ बगियम् जाइ परी । आब अपनेहे वहाँसे छुट्कारा मिलगैल बा । टब राजा करन पुछठ टै साधारण मनै नै हुइटे । बटा टै आपन परिचय ? विर विक्रमा कहठ – मै राजा विर विक्रमा हुँ । टब फेन राजा करन कहठ – टै महिनसे बरवार बटे, धनी बटे, टै मोर घर चौकिदार काहे बनल बटे ? जाउ विर विक्रमा आजसे मै टुहिन काममे नाइ ढारम । टुहिन काममे ढरना मोर लाजके बात हो । जाउ आजसे टोहार छुट्टि । राजा विर विक्रमा छुट्टि लेके इमरट बुन्डिया लेके आपन घर राजमहलमे चल जाइठ । राजमहलमे पुग्के बभनिन्यक देहमे छिरिक देहेट । बभनिन्या ठिक हु जाइठ । पहिलेक जस्ते जस्के टस बिल्गाइ लागठ ।

(बहुट दिनके बादमे नौवहे आपन सँघरिया राजा विर विक्रमासे भेटघाट करनास लग्ठिस । भेट करे आइठ राजा विर विक्रमक घर । घर पुगठ, रामरमैया हुइठीन । राजा विर विक्रमा आपन सघरिया नौवहे पानी पिवैठै । बातचित उठ्ठिन । ) नौव कहठ – सघारी हमरे सक्कु पह्राइ पहरली पहरली काया पलट पह्राइ कबु नाइ पहरली । चली सघारी काया पलट पह्राइ पह्रे । राजा विर विक्रमा कहट – चलि जाइटे काया पलट पह्राइ फेन पह्रली । (दुनु जाने सघरिया कासीमे काया पलट पह्राइ पह्रे चल देठै । कासीमे पुग्के काया पलट पह्राइ पह्रठै । पहरके सेक्के घरे आइ लग्ठै । आइट – आइट बन्वामे पुग्ठै । बन्वा पुग्के बहाना लगैटी नौव हेगे÷झारा करे जाइटु कहिके बन्वमसे सुग्वा मारके आपन गोझुम ढैलेहेट । नौव राजक ठन आके कहठ – सब विद्या पह्रली कुछ नाइ देखैली ? नौव एकदमसे यहे बात घोस्ले रहठ । बात सुन्के राजाहे रिस लग्ठिस । टब राजा कठै – देखैना टे देखैना रहे केमे देखैना विचार करना टे ? नौव गोझुमसे सुग्वा निकारमे लब्दाइट ओ कहठ –लि यहे सुग्वकमे विचार करी ना ? विर विक्रमा लौटपौट करट सुग्वक देहमे चल जाइठ । सुग्वा भुरसे उरके आपन बग्गालमे चल जाइठ । ऊ सुग्वक १०० सुग्गनके एक्के बग्गाल रठिन । नौव चलाक जात भुइयाँमे लौटपौट करट राजा विर विक्रमाके देहमे चल जाइट । नौव आपन लास वहै छोरके विर विक्रमाके घर पुग्जाइठ । विर विक्रमा आपन गोसिन्याहे आगे बटैले रहठ । जब मै काया पलट पह्राइ पह्रके अइम टे बाया हातके कानी अङ्ग्रीमे चुम्मा लेम टे टै जान लिस कि इ मोर गोस्या विर विक्रमा हुइट । नौव विर विक्रमाके घर टे पुगठ मने बाइ हातके कानी अगुनियक चुम्मा नाइ लेहठ । अत्रैमे विर विक्रमाके मेधारु जान लेठिस कि इ मोर गोस्या विर विक्रमा नाइ हो ।

(विर विक्रमा आपन बग्गाले बग्गाल उरटी दोसुर देश पुग्जाइठ । ऊ देशमे सुग्गा मरलेसे राजा इनाम फेन देना आउर सुग्गा फेन फिर्ता कर देना । घरे जाके सुग्वक शिकार फेन खाइ मिल जैना । एक दिन वहे देशके एकठो गरीब बुह्रवा बाहेर गैल रहट । बाहर कुछ दिन बैठ्के घरे आइठ । घरे आइठ टे गोसिन्या सुनाइ लग्ठिस भाण । गाउँक मनै सुग्वा मार– मार इनाम पैठै आउर सुग्वक शिकार फेन खाइ मिल जिठिन । हमार बड्डो झुन बाहेरे – बाहेरे । काम ना कैबज दिन भर बाहेरे बाहेर । ना इनाम ना शिकार । बड्डी टै रुकटे आज मै सुग्वा बझाके देखैम । सुग्गनके बग्गाल कौन रुख्वम बैठ्ठै कैहके मै जन्ले बटु । आज मै लासा लगैम । लासा बनाइठ व रुख्वक टिपुन्नासम लासा लगा आइठ । रात परठ सक्कु सुग्गा बसेरा लेहे चल्ःठै । १०० सुग्गा वाला बग्गाल फे चल देठै बसेरा लेहे । वहे १०० सुग्गा मनसे १ सुग्गा राजा विर विक्रमा रहठ । जौन रुख्वम बुह्रवा लासा लगैले रहठ वहे रुख्वा पुग्ठै टे विर विक्रमा जान लेहेठ यमे लासा लगाइल बा कहिके । विर विक्रमा कहठ यमे लासा लगाइल बा । इ रुख्वम नाइ बैठी । दोसुर सुग्गा कठै रोज टे हम्रे यहे रुख्वम बैठ्ठी कुछ नाइ हुइठ । आज बैठब टे का हुइ । सब सुग्गा जम्जमाके रुख्वामे टरेसे लेके उप्पर टक बैठ्ठै । विर विक्रमा रुख्वक सबसे टिपुन्नीम बैठट । सब सुग्गा लासामे बाझ जिठै । विर विक्रमा टिसुन्गीम बाझल रहट । विर विक्रमा सक्कु सुग्गन कहट– जब सुग्वा मरुइया आइ टे सक्कु जे मरल हस हुजैहो । ऊ जस्ते भुइयम छुटाछुटा बेगाइ वस्ते मरल भेगमे रहोहो । हम्रे जस्ते १०० सुग्गा पुगब टब जम्मा जे उरजाब कहिके सम्झाइठ । बिहान्नी बुह्रवा सुग्वा छुटाइ जाइठ । पुगटटे बहुट सुग्गन बाझल देखट । रुख्वम चिहुरठ सब सुग्गा मरलहस रठै । बुह्रवा १÷१ करके सुग्वन टरे गिरैटी जाइठ । गिराइट–गिराइट ९९ सुग्गा पुग्ठै । सुग्गनहे आब १०० सुग्गा पुगलहस लग्ठिन । आब सब सुग्गा टरे आगिली आब उरजाइ । ९९ सुग्गा भुरभुर हुक उरजिठै । विर विक्रमा टिसुङगीम चप्टल पला रहट । बुह्रवा कहट १ सुग्वा टे पला बा । विर विक्रमाहे पकरके लैजाके छिट्वासे टोप देहठ व आपन मेधारुहे कहट टै सुग्वा मारके तयार करले रहिस । मै बजार मसाला लेहे जाइटु । बु¥ह्वा बजार घुमघामके सर–सामान लेके घरे आइठ । सुग्वइ मरले कि नै कैहके पुछठ । गोसिन्या कठिस– मै नै मरठु बरा, सुग्वा मनैन नन्हे बोलठ । बु¥ह्वा कहट– मै मारम सुग्वइ । सुग्वइ मारक लाग हाठ लमाइठ कि सुग्वा बोल परठ– भैया टै महिन मारके करबे का, मोर शिकार खाके टोर पेटफे नाइ भरी । बु¥ह्वा कहठ– अरे इ टे मनैन नन्हे बोलठ । सुग्वा फेन आपन बात कहट– भैया टोहरे मरबो टे १ दिन खैबो । बरु महिन बेच देउ । बेच्बो टे महिन टुहिनके जिन्गी भर खाइ पुगी । ( इ बात सुन्के बु¥ह्वा बेचे चल देहठ ।)

बु¥ह्वा कहठ–सुग्वा लैलेउ । सुग्वा लैलेउ ।सुग्वा बोलठ – भैया टै मोर मोल ना बटाइस । मै आपन मोल अप्नेहे बटैम । बु¥ह्वा फेन कहे लागठ – सुग्वा लैलेउ । सुग्वा लैलेउ । गाउँक मनै पुछे लग्ठै कटरक देबे । बु¥ह्वा कहठ – सुग्वा आपन मोल अपनहि बताइ । मनै सुग्वाहे पुछ्ठै – टोर मोल कटरा हो । सुग्वा कहठ –मोर मोल १ लाख टका (सोनक रुप्या) हो ।(भल्मुन मनै किने नै सेक्ठै । बु¥ह्वा बेचट – बेचट राज दरबार पुग्जाइठ राजक ठन ।) बु¥ह्वा कहठ – सुग्वक मोल सुग्वा जानी । फेन सुग्वा कहठ – मोर मोल १ लाख टका हो । राजा ऊ सुग्वा ( विर विक्रमा) हे १ लाख टका दे के किन लेहठ । बु¥ह्वा सुग्वइ बेच्के १ लाख टका लेके घरे चल जाइठ ।

(एकठो गाउँमे गाउँक लरका भेरी च¥हाइ जैठै । वहाँ जाके राजा, मन्त्री, सेना बन्ना खेल खेल्ठै । जे सफा ठाउँमे (टोकल ठाउँमे) आगे बैठजाइ टे ऊ राजा बनी । जे उहिसे ठोरचे पाछे बैठी टे ऊ मन्त्री बनी । ढिरेढिरे पाछुक बैठुइयन सेना,दुवारपाले बनी कैहके भेरी च¥हुइया लरका खेल खेल्ठै । )

एक डिन इ बात वहे देशके राजक कानम झुन पर्ठिस । राजा टे मै हुँ उने कैसिक राजा बन्ठै । राजा टे राजा मन्त्रीसे लेके सेना, दुवारपाले जम्मा बन्जिठै । अस्ते–अस्ते सोच्टी राजा एक डिन चल परठ वहे गाउँमे । गाउँमे जाके लरकनके खेल्लक राजा बन्लक ठाउँमे खोडाइठ । राजा बन्लक ठाउँमे खोडाइट टे टामक चड्डर निकर्ठिस । मन्त्री बनल ठाउँ खोडाइट टे खटिया निकरठिस । अस्ते–अस्ते तमान सामान निकर्ठिस । सक्कु सामान ढोइठै ओ टामके चड्डर, खटिया ढोकेफे राज दरबार लैजाइठ । लैजाके कोठम सक्कु सामान ढारठ । राजा लहाइट । लहालुहुके खटिया विछाके खटियम आराम करे जाइ लागठ । एक गोर खटियम ढर्टिकि खटिया बोलठ – विर विक्रमा जस्ते दान करले हुइबे टे बैठे पैबे नैटे नै पैबे । टबसे राजा एक गोर ढारके दोसुर गोर खटियम नै ढार पाइठ । टबसे राजा एक गोरेक भले ठह¥यैलेक ठह¥यैले रहि जाइठ ।

(बहुट ढेर डिनसे राजा विर विक्रमक मौसी चिन्तामे रठिस । आपन छावइ चिनेह नाइ सेक्के । भूतप्रेते छावा बन्के आइल रठिस व आपन सग्गे छावा काम करके पाछे घरे पुग्ठिस । भूत्वा आगे छावा बन्के आइल वरसे कौन मोर आपन छावा हो कहिके जाने नाइ सेकठ । दुनु जाने अक्केनास बिल्गैठै । टब मोर छावा कौन होवइ कहिके चिनेह नै सेकठ ।)

छावा चिनेह नाइ सेक्के समस्यामे परजाइठ । एक डिन मौसी पता पैठिस । एकठो सुग्वा चाहे जत्रा कररा मुद्धा रलेसेफे सुग्वा मजासे न्याय करठ । चाहे जैसिन कररा मुद्धा फेन मजासे सक्कु जनहन न्याय करठ । वहे सुग्गा मुद्धा छिनोफानो करक लाग मगाइ परल कना सोच बनाइठ । दोसुर दिन वहे सुग्वा लेहे पठाइट । सुग्वा लन्ठै । सुग्वाहे समस्या सुनैठै । सुग्वा समस्या सुन्के आपन मौसीहे कहट –पाँचठो टोटी रहल करुवा लेके आऊ । पाँच टोटीके करुवा लन्ठै । करुवा बिच्चे ढारके सुग्वा कहठ–जे यकर छावा हुइटे इ करुवामे पेल्के बैठी व भित्तर बैठ्के बातफे करी । बात करके निकरेफे परी । टब खास छावा कठिस–मै टे नै पेल पैम । भूतप्रेतवाला कहठ– मै पेलम । सुग्वा कहठ–करुवामे पेलके बात कर । भूत्वा पेलठ व बात करठ । बात करटी–करटी सुग्वा आपन मौसीहे ठेकी मारे कहट । ठेकी मारके सेकठै टे तीन पट्टीमे गार याउ कैहके सुग्वा कहठ । भूत्वाहे गारके अइठै टे सुग्वा सम्झैटी कहट–इ टोर छावा हो, मनै कहु करुवामे पेले सेकी । ऊ भूत्वा रहे टबेमारे ऊ करुवामे पेले सेक देहल । टब जाके मौसी कठिस–सुग्वाहे जहासे नन्ले रहो वहै पठायाऊ । काम करुइया जहासे सुग्वा नन्ले रठै वहै राजक घर पठा यैठै ।

( रज्वक सुग्वा खोब मजासे न्याय करठ कना बात एक कान दुई कान मैदान हु जाइठ । सक्कुओर हल्ला फैल जाइठ । एक दिनके बात हो । विर विक्रमक गोसिन्याफे सुग्वक बारेम सुन्लेठिस । सुन्टीकि आपन गोस्या पता लगाइक लाग सुग्वा मगैना विचार करठ । सुग्वा बलाइक लाग कलकरुवनहे बलैना विचार करठ । कलकरुवनहे बलाइ पठाइट । कलकरुवनहे बलाके लन्ठै । विर विक्रमक गोसिन्या कलकरुवनहे टमाशा देखाइ कहट ।)

कलकरुवन टमाशा देखाइ लग्ठै । टमाशा देखाके सेक्ठै टे रानी कलकरुवनहे सुग्वा लेहे पठाइट । कलकरुवन सुग्वा लेहे जैठै । रानी एहोर भेरवा लेहे पठाइट आपन कामदार हुकनहे । ओहे भेरवाहे कुछ दिन पालके ओहे भेरवकमे विचार कराइक लाग मगैले रहठ । वहाँ राजक घर पुग्के कलकरुवन राजाहे टमाशा देखाइ लग्ठै । खोब टमाशा देखैठै । कलकरुवन टमाशा देखाके सेक्ठै । टब टमाशा देखैलक चाउर ,सिधा, रुप्या मागे लग्ठै । सक्कुजे आपन सेक्ना सम रुप्या चाउर देके सहयोग करठै । राजा रुप्या देहे लागठ । कलकरुवन कठै–राजा जी हम्रिहिन रुप्या नाइ चाहि । रज्वा कहट–बताउ टुहिनहे का चाहि ? टब कलकरुवन कठै–हम्रिहिन सुग्वा चाहि । सुग्वा हुइलेसे हमार पुग्जाइ । राजा आपन सुग्वा बिना हिच्किचैले कलकरुवनहे दै देहेट । कलकरुवन पिंजरक सुग्वा लेके राजा विर विक्रमक घर चल देठै । राजा विर विक्रमक घर पुग्ठै । वहाँ पुग्के फेनसे कलकरुवन आपन जादू टमाशा देखाइ लग्ठै । टमाशा देखाके सेक्टिकि राजा विर विक्रमक गोसिन्या कठिस–आपन गोस्या बनुइया नौवहे । राजा जी सब पह्राइ पहरलोपहरलो मने कयापलटके कुछ नाइ देखैलो ? राजा बनुइया नौव कहट–देखैना टे देखैना हो मने केमे देखाउ ? रानी कहट–आपन पालल भेरवाहे मारके अङनम लब्दाइत ओ कहट । लेउ यहे भेरवकमे देखाउ । राजा बनुइया नौव लौटपौट करट मरल भेरवक देहमे नौवक जीउ चल जिठिस । भेरवा जि जाइठ । यहे कठै चत्तुर कौवा गुह खिदोरे । नौव कहाँ पाइ आब आपन देह । आपन देहटे वहै पैहले बन्वामे छोरके आगिल रहट । ओहे लग्ले रानी कलकरुवनहे काम करैलक ओ टमाशा देखैलक ओरसे ए हे भेरवाहे मारके खा लेहो कहिके रानी कलकरुवनहे भेरवा दैदेहट । राजा विर विक्रमक गोसिन्या सुग्वाहे कहट–सुग्वा टै लौटपौट करके देखा । सुग्वा लौटपौट करट । राजा विर विक्रमक देहमे चल जाइठ । राजा विर विक्रमा पहिले सुग्वा बनेबेर आपन देह छोरले रहे । सुग्वा मनसे फेनसे आपन देहमे आजाइठ । राजा विर विक्रमा सुग्वा बन्के देश विदेश कहाँ–कहाँ घुमट । समयके खेल लास्टमे आके विर विक्रमा आपन देहमे आजाइठ । राजा विर विक्रमा ओ रानी आपन बाँकी जिन्गी खुशीसे बिटैठै ।

हसिँया ले बो कि बेट ? - बेट
टोँहार आउर मोर सदा दिन भेट ।

(ओराइल)

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