सहयोगी सहेलि

खिस्सा / बट्कुही १७ फाल्गुन २०७७, सोमबार Hits : 270
सहयोगी सहेलि

- लाछु डंगौरा थारु (प्यासी)

आजसे धेर साल पहिलेक बातहो जबमै ८/९ सालके रहुँ। हम्रे बरा जन्गर रहि । हमार घरेम एक्के घरेम रना एक्के संगे कर्ना एक्के भन्सामे मिलजुल्के खैना छोटबर सक्कु मिलाके २५ जहन्के घरपरिवार रहे।

उहेघरेमे बैठना खैना मनिक एककोन्तिक हमार छोटमोट परिवार फे रहे जोन कोन्ती हे घरेक साक्कु जाने हमार बाबा चारथो भाईमनिक मझ्ला हुईलेक ओर्से घरेक काका काकी बदाई बरापु हुक्रे मझ्लान कोन्तिक कहिके कहैँ।

जोनकोन्तिम हमार बाबादाई मै एक्थो दिदी भागरती ओ दुईथो बाबुनके सहेली ओ अनिता रहि। घरेक बदाई,काकी हुँक्रे ओ हमार दाई मिल्के एक्के घरेम खउईया धेरजाने हुईलेक कारण भन्साकर्ना एक्के जाने कर्लेसे हैरान हुई कहिके सबजाने दुई दुईमहिना दश दशदिन कर्के पाला लगैले रहैँ।

चैतके महिना रहे हमार दाईक भन्साकैना पाला रहिस। ओत्रा २५/२५ जहन के खैना भात तिना निहिन्ना खवाईना भाँरा बर्तन धोईना सहेर्ना फे घरेक आउर बाहेरके काम करेक पर्ना उप्परसे मोर छुटकि बाबू अनिता छोट मोटरहे भर्खर एकसाल्के उहिन सहेर्ना तेल बुकुवा लगैना गुहा ओढ्ना बिछौना धोइना ।

कत्रा कररा काम रहिस हमार दाईक । चैतके मौसम चारु ओर मस्री ,गोँहु कात्के खेत्वा खुल्ला पूरा खाली हुईगिल रहे। घरेमे कात्ल गोहुँ दैना कहिके खेन्हुँवामे नान्के ठाक लगाईल रहे । चैतके मौसमफे कैसिन रातके तनिक जुरार कर्ना दिनके चिक्तेहस धुप्पन्हस घाम कर्ना ।

उहे मौसम उहे बात समझ्के महिन अभिन तक आज घरितक रुखुवामन्से गिरल पतिया, राह लागल बनुवा, हस लाग्त । समय समय मे उ दिन उबेर पलपल ईकानेसे सुनेहस ई आँखिसे देखे हस लागत ओ ई छातिमे एक्थो छुत्ते मेराईक पिरा जागत पिराईत भोभाईत तड्पाइत ओ ई आँखी दगर बिना बद्रीक पानी बर्साईत।

आखिर काहो? कैसिन्हो? ई मनैनके जिन्दगि काकरे रच्नै ईशरु ? अईसिक? मनैनके जिन्दगी।

अस्ते अस्ते किसिम किसिमके मेरमेराईक प्रश्न मनेम उठ्ती रहत । उहे समयक बातहो मोर बर्की बाबू सहेली चार सालके रहे हम्रे सक्कुजाने सुखी  ओ खुसी रहि। सायत उ खुसीक पल ई बैरी भगन्वाहे मन नैपर्लिस देखे नाईसेकल साईत हम्हन बह्रती पहुँर्ती फुल्ती देख्के बिह्रे मुवाल हुई।

मोरबाबु सहेली महिन कत्रा धेर मैया करे मैफे उहिन बहुत माया करुँ। हम्रे सहेली से संगे घरेक ओ आउर अंजर पँजरके हमारे अदृक संघरियनसे मिल्के बुक्रीभँरा, सिक्ता, घर बसाहुर,कान कुटुस ,खुँटा सँताहुर,नुकिक सँधा खेली।

सहेलीक गोरामे घुँघ्ना बाँधल रहिस । सहेली छुटिमुटी ठुलठुल तनिक ठेप्कुर चपचपचप सक्कुहुनसे बोल्नाह हुईलेक कारण सक्कु जाने छोट से बर हम्रे सहेलीहे “ठेम्ची” कहिके फे बलाई। सहेली  छोट रलेसेफे मोरमन खोप बुझे सहयोग करे ।

कोनोदिन मै घरे बिगार कर्के दाईबाबनसे पित्वा पाईक डरे भागल बेर दाईबाबा घरे नाईरहल बेला घर घर महिन खोज्के कहे दादा चोल भातखाई दाईओ बाबा घरेनाई होँई । ओस्तेके दाइ बाबा घरेनै रहल बेर कुल्वा , झन्हियाँमे लहाउँ। दाइबाबा साँही जुन खेत्वा मन्से काम कर्के घारे आँई आके सहेलिसे पुँछै आज तोर दादा झन्हियाँ मे लहाईल किनाई? सहेली दाईबाबान ठाग्देहे महिन लहाईत देख्लेरहे तबु नाई लाहाईल कहिके कहि देहे। नजाने काहुईलिस सहेली हे? सहेलि एक्कासी एकदिन बिमार हुईगिल।

उ साँझ अभिनफे महिन यादबा। भर्खर अंधार हुईतेहे सहेली चिल्ला चिल्ला रोय ओ कहे दाइ मोर पेत !!! पिराईता दाइ मोर पेत !!! पिराईता । घरेक मनै सक्कु जाने अचम्म पर्गिनै कहैँ अरे अब्बेतो ई लवान्दी मजाके हँस हँस खेलतेहे अब्बही काहुई गैलिस असिके रोईता ओ असिन कहता कहिके।

घरेक मनै बेरि फे नै खैले रहैँ । सहेलीक बोल सुन्के मै हलि हलि दाइहे बलाई गैनु सहेली घरेक ओसर्हुवाम लोट लोट रोईती रहे । दाई भन्सामन्से निकरके हली कानुम लैलेहेल ओ पुछेलाग्ल काहुईल छाई के पितल ? सहेले रोईती आवाजमे कहल पेत पिराईता। मै फे धिरेसे दाईक पन्ज्रे जाके बैठगिनु ।

मोर बाबू सहेली ओब्धे भुँइयम लोत्के जम्मा धुर लाग्के भुवार हुईगिल रहे छुटि छुटि भुत्लामे रिबन लेके पारल झोँती छुत्गिल रहिस। मै सहेलिक आंग मन्से धुर झरादेथुँ। तपतक बाबाफे आईगिल रहत।

बाबा पुँछत काहुईलिस सहेलिक? सहेलिक असिम हालत देख्के दाइक हौक भौक हेराई गिल रथिस दुखियारि नरम सोरमे दाईकहत खोप पेत पिराईतिस जाउ हाली गुरुवाक घर आछ्त हेराई । ओत्रा सुन्तिके बाबा कहत लेतो तै लर्कन हेरिस मै जाईतु आछत हेराई कहिके बा भन्सा घरेम पेलत चौरिही कुथ्ली मन्से एकचुती चाउर निकारके पतियम पोक्रयाके गोझुम जकैती गुरुवाक घरेओर चल्जाईत।

यहोँर सहेली ओस्तेके रोईती रहत ओहोँर छुत्की बाबू अनिता फे जाग्जाईत । उफे चहर चहर रोईलाग्त अनितक रोइत बोल सुन्के दाइ दिदीहे कहत जा छुत्की बाबू उठ्गिल नयान । दिदी कोन्ती मन्से अनिताहे नान्के कानुम लैके धेबर चुक्चुक्वा चुक्चुक्वा सुफ्लाईत ओ कहत चुपाईल रोह्बाबु चुपाईल रोह।

यहोँर दाइ सहेलिहे कानुम लैके मुरि सुहुरैती सुफ्लाईत ओ कहत चुपाईलरोह छाई तोर बाबा अब्बे आछत हेराई गिल्बातै अब्बे पेत चुपाई जाई। तनिक बेर पाछे सहेलीक पिरा साईत कम हुईजैथिस दाईक कानुम सहेली निदाईगिल रहत।

तब हमार दाई कहत चोलो कोन्तिम रात हुईगिल। हम्रे सब जाने आपन सुत्ना कोन्ती ओर जैथी।

सक्कु काका काकिनके बदाईबरापुनके कोन्तिम दिया बरल ओजार रहत। हमार  कोन्तीजुन चुक अँराइल हस अन्धार कुप रहत । 

साइत दाइ अन्धार कोन्ती देख्के महिन कहत जा छावा दिया खोज्के सुल्गाके नान? मै अन्धार कोन्तीम हथ्ला हथ्ला दिया खोज्के काकिनके कोन्ती मन्से सुल्गाके नन्थु। दाईमहिन पथ्री बिछाइक कहत मै दाईक खतियम भल्मन पथ्री बिछादेथुँ उहे पथ्रीमे दाइ धिरेसे सहेलीहे सुता देहेत।

 ओ दिदिक हाँथे मन्से छुत्की बाबू अनिताहे अपन कानुम लेहेत। हम्रे बाबक दग्रा हेर्थी कब आई बाबा कहिके। रातफे छिपेलागत जोहोर तोँहोर किरा काँती बोले लागल रथै।घरेक आउर मनै एक्का दुक्का कर्ती सक्कु जाने बेरि खाके सुत्गिल रथैँ। घर सुन हुईगिल रहत ।

काका काकिनके कोन्तिमका दिया बुत्जाईत । हमार कोन्तिम जुन गुरुवाक घर आछत हेराई गैल बाबाक अस्रामे दिया बर्ती रहत । तनिक बेर रहिके हमार घरेक दुवार भुकरुक से खोले हस अवाज आईत तब हमार दाइ दिदी ओ महिन कहत तुहुरन्के बाबा आईगिनै।

बाबा कोन्तिम पेल्तिके दाईसे पुछ्त सहेलिक पेत चुपैलिस?? दाई धिरेसे उत्तर देहेत कनि चुपाईल हुईहिस तबेतो निदाईगिल। बाबा फे दोसर अँख्रा पुँछत बेरि खाईलकी ओस्ते निदाई गिल? फे दाइ कहत सहेली फे नाई खैलेहो हम्रेफे नाई खैले हुई। तब दाई बाबासे पुछ्त अरेउ कैसिन बतैनै हुरुवा बाबुक ओर्से अईसिनके रोईरेहे? बाबा कोन्तीमे मोर बैठल खातियामे बैठती कहत पताचली तो बतैम कहनै।

ओत्रा सुन्तिकेल दाई कहत चोलो हलि बेरि खाई बर रात हुईगिल काल अनगित्ती उठना बा । हम्रे बाबा दाई दिदी ओ मै भन्सा कोन्तिम जाके हल हल बेरि खाके सुत्जैथी।

मोर सकर्हि स्कुल जैना हुईलेक ओर्से दोसर बिहानके दाई अनगुत्ति जगादेहेत । मै पथ्री मन्से उठके भन्साकोन्ती ओर जैथुँ। सहेली महिन्से अग्द्दु उठके एकपँजार गडेलिमे अईया!! अईया !! कर्ती हहनैती सुतल अल्मल अल्मल करत ।

मै दाईसे पुछ्थुँ दाई बाबूक अभिन पेत पिरैती बातिस ? हमार दाइ चिन्तालैके भरल सोरमे कहत हँ छावा तोर बहिन्याक अभिन पेत पिराईति बातिस आज रातभर सुत्ले होना सुते देलेहो। रात भर रोईलेबा ओ हेग्लेबा कहत दाइ। 

मै सहेलिक थन जाके बैठथु सहेलीहे हेर्थु तो सहेली आँखी तुम्ले रहत ओ अईया !! अईया किल करत मै सहेली हे बोल्कर्थु तर सहेली एकतुम नाई बोलत सायत सहेली हे आउर नाई मजालग्थिस। मै ओत्थे बैठल रथुँ दाइ एक चुल्हम बत्लक भात ओ दोसर चुल्हम करहियामे तिना बैठाके तरे गुर गुर आगि कैले रहत चिरुवा फत्थी रसगर के आपन मन्का बर्ती रहत भात तिना रिझ्ती रहत ओहोँर हमार दाइ घनु तिना खिदोरत घनु भात खिदोरत फे दोक्नी मे नोन मिर्चा खुँदत।

मै दाइक रम्ता हेर्के सोँच्थुँ हमार दाइ कत्रा धेउर काम अक्केली करत। आगि बुतेहस करत तो दाइ आगि थत्कोर्ती अगिहा फत्थी जोताके खोप फुँकत दाईहे धुँवा लग्थिस दाइ खोँखत । ओहोर एकपाँजर दाइक सुल्गाके कुथ्लिक भर्कनेम धैल दिया जुगुर जुगुर आपन सुरमे बर्ती रहत ।

तबहिँ दाइ कहत आज स्कुल नाई जैबे? जाहाली हाँत गोर धोई उहरे मोका दगर ओजार देखाई लागल बिहान हुईगिल।जत्तिके मै मोकाओर हेर्थु तो ओजार हुइलागल रहत।मै झस्क्के उठथु हात मुह धोके अईथुँ दाइ महिन बासि धिकाके भात देहेत खाके मै लुग्रा घाल्के हाँथेम किताब लैके दाइ मै स्कुल जाईतुतो ना ?दाइ कहत जा दुपहरके छुट्टीहुईतो हाली आईस ।

मोर सहेलिक पर ज्यु लाग्ल रहत मै जाईबर फे उहिन बोल्कर्थु सहेली नै बोलत । मै सहेलिहे हेर्केकिल घरेमन्से निकरजैथुँ स्कुल चल्जैथुँ । मोर ज्यु लागल रहत घरे । सरिरतो रहत स्कुलमे मनो मनचाहीँ सहेलिक संग रहिजाईत कस्तोक कस्तोक दिन कतत।

स्कुल मन्से छुट्टी हुईल संकेतके घण्टी बोलात जेकर पर्खाईमे मै रथुँ। मै उ घण्टीक अवाजे संग कोथामन्से किताब लैके निकर जैथुँ ।

मनेम मजा नैमजा बात खेलैती घरपुग्जैथु। जब घर पुग्थुँतो ओत्रा भरी ढोलहस घर पुरै खाली रहत सुन लागत जोहोर तोहोर मुर्गी कर्कराईत बोलत किल सुन जाईत सायत घरेक मनै सब कामकरे चलगिल रथै।

कनि कैसिक मै बगर्वा ओर हेर्थुतो दाइहे देख्थु दाइ लुग्रा धोके सुखुवाईती रहत । दाइसे पुछ्थु दाइ बाबुहे मजा लग्लिस ? कहाँ बा ? दाइ मोर यक्के प्राश्नक जवाफ देहेत। उहरे बगर्वामे खतौलिम सुतलबा।

मै घम्माईल रथुँ घामे घामे स्कुलसे आके। झुल्वा निकर्ती मै सहेलिक खतिया थन पुगजैथु ।

मोरबाबु सहेली जाग्ल रहत रोईन छोइन अन्धार मुह करैले महिन देखत तबो नै बोलत मै सहेलिहे चुमचाम देख्के सोँच्थुँ सहेलिहे मजा लाग गैलिस।

सहेली आउर दिनिक लैके बरा  फरक देखाईत आँखी पेलल पेलल गाल पोक्चाईल हाँत गोर नरम देखैथिस । फिराक किल घल्ले सुतल रहत ।

पेत फुल्के छाती से उँच पेत देखैथिस। पेतेम दाइ भुवार भुवार जाँरेक बिरुवा पिस्के पेत पच्कहिस कहिके कनि कैचो लगासेक्ले रहत। सायत दाइहे कोई बतैले रहल हुईहिस जाँरेक बिर्वा लगैलेसे लर्कनके फुलल पेत पच्कजैथिन कहिके। मै सहेलिहे पुछ्थुँ बाबू पेत पिराईता किनाई? मोर बोल सुन्के सहेली मोरे ओर मुह कराके चिरै बोलेहस पात्तिर सोर्मे पिर भरल अवाजमे कहत।

थोर थोर पिराईता। अस्तेके हम्रे सहेलीसे बात बतुवाईती रथी मै कुछु कथुँतो सहेली तनिक बेर रहिके जवाप देहेत । कुछ बेर रहिके बाबा आके दाइहे कहत अरे सहेलिहे कुग्रा घलादे ? एक घचिक मै सहेलिहे अस्पताल लैजाउँ । दाइ हाली हाली बाबुहे झरा पराके लुग्रा घला देहेत। सँझ हुईती रहे ।

पश छुत्वा जुन हुई गिल रहे गाउँक मनै सक्कु जाने गोरु ,भैँस,भेँरी,छेग्री छोरके खेतुवाम चराई लइजाई लागल रहै हमार घरेक पसफे सब चरे गैगिल रहैँ। बाबा बाबुहे खतौली मन्से उठाके बाबुक मुन्ती आपन कन्धम कराके कानु लैलेहेत। मै बाबै कथुँ बाबा महु जैम अस्पताल? बाबा एक्घचिक अक्मकाईहस कर्के तनिक जोरसे कहत चोल मनो नेंगेक परि ? मै ओ बाबा बाबुहे लैके अस्पताल ओर नेङ्ग्जैथी ।

गाउँ गाउँ जैथी द्ग्रामे गाउँक मनै पुछ्थैँ कहाँ जाईतो कहिके बाबा कहत ई लवान्दी हे काल्से मजा नाईलाग्थुइस तबे अस्पताल लैजाइती कहिके कहत। करिब हम्रे २५/३० मिनेतके दग्रा नेङ्ग्के खक्रौला घटुवाथन बंगल्या कना डकतर्वाक अस्पतालमे पुग्जिथी। उ अस्पताल्मे हम्रन्से आघे आईल मनै ३/४ जाने बैठल रथैँ । हमार बाबाहे  उ अस्पतालके डग्तर्वा पहिले से चिहिन्ले रहत ।

 बाबाहे देख्तिकील राम राम मझ्लादादा कहत बाबा धिरेसे ओकर राम राम घुमाइत । डकतर्वा बाबासे फे पुछत काहुईल दादा ? बाबा कहत कुछुनाई कालसे ईलवन्दिहे नाई मजा लागथुईस तबे नन्ले बातुँ । डग्तर्वा कहत बैठोदादा य्क्घची अब्बा यन्हे बिर्वा दैलिउँतो बलैम कहत।

हम्रे बाबैसे बेराम बाबुहे कानुमलेले अस्पतालके अंग्नम बैठल रथी। तनिक बेर पाछे सहेलि जाग्के बाबै कहत बाबा पानी पियम । बाबा कहत अब्बे रहिले बाबू । बाबा महिन कहत जा पानीलेहे मै गिलासेम पानी नन्थुँ ओ सहेलिहे पानी पिवाईथुँ ।

सहेली एक दुई घुटुक्काकेल पानी पिके गिलास मन्से मुह छुतालेहेत मै बाँकी पानी बगाके गिलास जहाँसे नन्ले रथुँ ओहै धैदेथुँ। सहेली फे आँखी तुम्के बाबक कानुम निदाईल हस हुईजाईत। हम्रे चिम चाम आपन पालक अस्रा हेर्ती बैठल रथी ।

तनिक बेर रहिके फे सहेली बाबै कहत। बाबा मै गद्दम सुतम बाबा दुखभरल अवाजमे कहत । अब्बे यहाँसे घरे जाबतो तोरदाइहे दुइतिन्थो गुद्री बिछाइक कहम तब तै गद्दम सुतिस्ना छाई कहिके बाबा कहत? खै??! बाबाक कहल बात मोरबाबु सुनत किनाई फे चिमचाम हुईजाईत सँसओँस नाई लेहे लागत बाबै पक्रल हाँत छुट्जैथिस ।

बाबा बाबुक मुरि पकरके यक हाँतलैके हिलाईत बाबू बाबू बाबा ओ मै कथी तबु नाई सुनत बाबाक आँखी मन्से नौधारा पानी पानी बहेहस आँसझरे लग्थिस मैफे बाबू बाबू कहती रोई लग्थु बाबाक कन्धा पकर्के। हम्रन रोईत सुन्के डकतर्वा हलिहील हमार थन आईत ।काहुईल ? काहुईल कहिके पुँछत ।

बाबा रोईती कहत काहुईगिलिस मोर छाईक नाई बोल्थो अब्बे भर्खरतो गद्दम सुतम कहतेहे । डकतर्वा फे बोल्कारत हिलाईत तर सहेली चालचुल नाई करत। डकतर्वा हँमार बाबुक हँथेक लारी पकर्के छामत लिल्हार छामत ओ पानी नान्के बाबुक पर एक दुईचो छितत तबु हमार बाबू चाल नाईकरत ।

डगतर्वा धिरे से कहत । दादा ईतो ओराईगिल। ई बात सुन्के बाबा आउर रोइलागत । मोर मनमे ईबात सुन्के खोप उप्परसे गिरे हस लागत मै सब्चिज भुलाई जिथुँ ओ कोब्से रोईलग्थुँ मोर मन तपतक कहत मोर बाबू नाईहो मुवाल मोरबाबु सुतलबा कहत । तर  बाबुतो मोर हँतसे एक दुई घुटुक्का पानी पिके सदकलग  हम्रन छोर्के चल गिल रहत।

अत्रा बात डगदर्वाक सुनके बाबा रोईती आँस पोँछ्ती उठत ओ बाबू अस्तेके आईबर बोक्के नन्ले रहत ओस्तेके कन्धम मुन्ती बाबुक पाछे ओर मुहकराके कानु लेहेत । हम्रे सहेलिक सरिरकिल लैके सँस ओ हंसा ओथहिँ छोर्के घरेओर लग्थी।

बाबक आँस नै थम्थिस बाबा आपन आँस पोछति महिन कहत हलि हलि नेँग साँझ् हुईता । मै बाबाक पाछे पाछे नेग्थुँ बाबा आईबर गाउँक डगर नाई नानत खेत्वा थाह्रे नेगाईत ।मै बाबक पाछे पाछे नेंग्थुँ ओ अपन बाबुक मुह हेर्ती रथुँ बाबू हेरि जागी तो मै देखम बोलम कहिके ।

तर हम्रे आँस पोँछती घरे पुग्जैथी मोर बाबू एक्चो फे आँखी नाई खोलत। घरेक सन्ध्री छिर्के हम्रे एक्छोत्ते हमार घरेक अंग्नामे निकर्थी। दाईक ज्यु लागल रथिस काहु हमारे दगर हेर्ती काम ओर्वाके अस्रालागल रहत ।

हम्रन देख्तिकेल दाइ हमार थन आईजाईत सायत दाइ हमार अनुहार हेर्के पता पाईगिल रहत । दाइ काहुईलिस काहुईलिस कहिके बाबाक कानुम्से सहेलिहे नकनक्से आप्न कानुम लै लेहेत। सहेली हे कानुम लेले दाइ खोप्से रोईलागत काहुईलिस मोर लर्कक काहुईलिस कहिके दाइ मुह छोर छोर रोईलागत । दाइ बरबरा बरबरा रोईत। ओहोर अनिताहे कानुम लेले दिदिफे चिल्ला चिल्ला दाईकथन जाके रोईलागत ।

हमार बाबुक काहुईगिलिस कहिके हम्रे फे बाबासे आँस पोछ्ती रोईती रथी । घरेक सक्कु जाने पता पाईजैथै सक्कुहुन्के आँखी रसाई जैथिन घरभरिक मनै रोईलग्थै ।

स्वर्ग हस हमार घर परिवार मे भारी बज्रपात हुईगिल रहत। साईत दुखके दिन अस्तेके भगुवान लिख्ले रहथुँही। सारा हमार घरेक मनै यक्के थन हुईजिथै। पच्छिँउ से मुहनिकारल दिन पुरुब जाके मुह नुकुवाईना सुर सार कर्ती रहत । 

हमार बर्का बुबा बाबाक थन आके कहत अरे काकर्बे महन्ला अस्ते हो मनैनके जिन्दगि जलम लैसेक्ले से सक्कुहुन मुहि परत । दिन बुरेलागल सहेलिहे आझी दिनबुर्नासे पहिलही माती दैदी दिनबुर्जाइत तप्से मुवाल मनैन माती नाई देजाईत। रातके माती दैदेबोतो दोसर जल्मम आँधर जलम लेथैँ कहिके बुबा कहत।

अत्रा कहिके बुबा आँखी भर आँसलेले दाईक थन जाके दाईहे सम्झाईत ओ कहत दे सहेलिहे दाइ नाईदेहेक मन करत आउर जोरसे दाइ रोईलागत । महिन दाईक रुवास सुन्के आउर दुख लाग्त मै दाइक थन जाके दाइहे कथुँ दाइ नाईरो दाईनाईरो दाइ मोर बात नाई सुनत । बाबा बुदु दाईक कानु मन्से सहेलिहे छिन्के तनिक दुर लैजिथैँ।

दाइ नाई लैजाउ मोर लर्कै नाईलैजाउ मोर्थन रहेदेउ कहिके खोप रोईत । दाईहे काकी हुक्रे पकर्ले रथैँ । बर्का बुबा सहेलिहे बोँकामे लेहेत ओ घरेक उत्तर पच्छिउँ ओरिक हमार दिहुवा ओर जाई लागत।  बुबक पाछे मैफे जाई लग्थु बाबुहे बुबा कहाँ लैजाईता कहिके। मोर पाछे पाछे हमार घरेक सक्कु परिवार मनिक लवान्दा मनै धिरे धिरे अईथै।

छुत्की काका कन्धामे फर्हुवा लेले आईत छुत्की बुबा सहेलिक घालल पहिरल कुग्राक मोत्री लेले आईत। हम्रे उहे दिहुवाक पच्छिँउक उत्तरका कोन्वामे पुग्थि बुबा ओथ्नहिँ जाके मोर बाबू सहेलिहे भुँईयम सुतादेहेत उज्जर बिछौना ओधा देहेत मोरमन कुल्बुल कुल्बुल करत मै सहेलिहे हेर्थु ओ रोईथु ।

काका हुक्रे एक्थो लत्थी नान्के सहेली हे नापके कत्थै ओ उहे नापके खतहा कोरे लग्थै ओत्थे रहल सक्कु कोई पालक ओसृ कोर्के खतहा मनै सम गहिँर बनाधर्थै। उहे खतहामे मोर बाबुहे छेत्नारके हाँत गोर घेँचा सोझ कराके सुताके उप्पर्से उज्जर खँर्की ओढा देथै खतहामन्से बाहेर निकर्के सक्कु जाने माती भास्काई लगथै।

मै मने मने सोच्थु मोर बाबुहे गरु लाफ्थुहिस सँसे उत्मुताईथुई। सायत उहे मोर बाबुक मंगन रहिस उहे गद्दा मँगन तबे बाबाहि पहिलही गद्दामे सुतम कहिके कलेरहे। मोर हाँतसे दुई घुतुक्का पानी पिके मोर बाबू सदा सदाके लग उ दिहुवाक कोन्वामे गद्दम सुतल्बा पापि भगुवान महिन्से मोर बहिन्याँ सहेलिहे छिन लेहेल।

मोर बाबू काबिगार कर्ले रहिस? आज घरितक ओकर संग गुजर्लेक हरेक पल महिन पुरै यादबा।

आज सहेली हमार बिचमे नाईहो!!! सहेलिसे छोत्की बाबू अनिता आज१९बर्षक हुईगिल्बा। ओकर नाकेम सहेलिक दैके गैल चिन्ह अभिन परल बातिस। हरपल महिन सहेलिक कमि महसुस हुईती रहत ओकर याद सतैती रहत सहेली ई संसार हेतो छोर्न सफल हुईगिल तर मोर मुटुहे छोर्ना सफल नाईहुईसेकल।

सहेली मै जियत घरिम मोर छतिम अमर रहि । हरेक तर तिहुवारमे सम्झाथु सोँच्थुँ आज सहेली फे रहततो ई माथेम भाईतिका तीन लाईन्के रहत घेँचामे तिन्थो फुलक माला रहत।

मैबहुत सम्झथु आज फे ई बात लिखेबर उहिन सझ्के आँखी रसाके आँस गिरता मै ईबात लिखेक लग बहुत हिम्मत जुताके आज पूरा करतुँ ।

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