हेरागिल भौंकाके अस्तित्व

१८ फाल्गुन २०७७, मंगलवार Hits : 206
हेरागिल भौंकाके अस्तित्व

लखन चौधरी: धनगढी ।

कौनो समय थारू समुदायके धनदौलत राख्न दराजके रुपमे रहल भौंका आपन अस्तित्व गुमासेक्ले बा ।

सुरक्षाके हिसावसे कम सुरक्षित, कम टिकाउपन तथा बनैना ज्ञान सीप ओ उपकरणके अभावके कारण भौंका प्रचलनसे हेराइ पुगल हो । भौंकाके संगे थारू समुदायमे रहल ज्ञान, मौलिक सीप फेन संग–संगे हेराइ पुगल बा । कलात्मक ढंगसे मुन्जके कसुन्गा तथा खेभ्रmीके खपेहट ओ पुंजाके प्रयोगसे बनाजिना भौंका चाहल आकार ओ प्रकारके बनाइ सेक्ना रहठ । अत्रही केल नाई होके भौंकामे हाठी, मजोर, कचौटीलगायत आकृतिकेपनुवा दर्नाफेन करजाए । जौन थारू समुदाय भित्तर रहल हस्तकलाके एकठो उदाहरण समेत रहल थारू बुद्धिजिविहुकनके कहाई बा ।

कैलालीके रतनपुर–८ भुइयाँफाँटाके स्थानीय बालकुमारी चौधरी सामान तथा बहुमूल्य सम्पति धारेक लाग भौंकाके प्रयोग हुइल बटैली । भौंकाके ठाउँ आधुनिक तथा सुरक्षाके हिसावसे मजा–मजा कठुवक तथा स्टिलके दराज आइल ओ आजकालके यूवाहुकनमे भौंका बनैना ज्ञान सीपके अभाव ओ बनाइक लाग चाहना आवश्यक सामग्रीके अभावके कारण फेन प्रचलनसे हटल उहाँके कहाई बा । बहुट डिजाइनदार भौंका बनैना काम करसेकल अनुभव सुनैटी उहाँ प्रचलनसे हटलपाछे आजकाल ढकिया ओ डेलुवा भर बिन्ना कामहे निरन्तरता देटी आइल जानकारी देली ।

एकठो भौंका बनाइक लाग हप्तौंसे धिउर समय लग्ना बतागिल बा । पानीसे नैभिजल अवस्थामे लम्मा समयसम प्रयोग करेसेकजिना भौंकाके विशेषता रहल बा । साथे भौंकाके धारल सामानके सुरक्षा ओ भौंकाके टिकाउपनाहे मध्येनजर करके भुइयाँसे उप्पर टाँगाके राखजिना करजाए । थारू समुदायमे भौंकाहे भुइयाँसे उप्पर टाँगाइक लाग फेन एकदमे कलात्मक ढंगसे बनाइल सिकाहरके प्रयोगसे बाँधके टाँगाजाए । भौंकाके अस्तित्व संगे सिकहर भंग्ना प्रचलन फेन हेरागिल बा ।

पहिले–पहिले आपन लर्कापर्कनके भोजकाजके बेलामे पहुराके रुपमे भौंका देना चलन फेन थारू समुदाय भित्तर रहल रहे । जेहिहे महत्वपूर्ण वस्तुके रुपमे लेजिना समेत करजाए । मने आधुनिकताके क्रम संगे आजकाल भोजकाजके बेलामे पहुराके रुपमे आधुनिक कठुवक तथा स्टिलके दराज देजिना करजाइठ ।
प्रचलनसे बाहेर हुइलपाछे आजकाल कहु–कहु थारू बस्तीमे कम महत्वपूर्ण सामान तथा खरठोर धर्ना काममे किल भौंकाके प्रयोग हुइल पाजाइठ ।

कैलालीके गदरिया–६ बेनौलीस्थित अपरम्पार निमाविके शिक्षक पल्टुराम चौधरी आपन घरमे अभिन भौंकाके कुछ प्रयोग हुइटी आइल बटैलै । पहिलेक जस्ते बहुमूल्य सामान नैधर्लेसे फेन आजकाल कम महत्वपूर्ण चीज राख्न काम भौंकामे हुइटी आइल शिक्षक चौधरी जानकारी देलै । थारू समुदायके कला ओ हस्तकलासे भौंकाके महत्व जोरल ओरसे संरक्षण करेक पर्ना समेत उहाँके तर्क बा ।

जनआवाजको टिप्पणीहरू