रानाथारू समुदायके ‘सावनके डोला’ संकटमे

१८ फाल्गुन २०७७, मंगलवार Hits : 405
रानाथारू समुदायके ‘सावनके डोला’ संकटमे

लखनचौधरी,
रानाथारू समुदायके साँस्कृतिक ओ धार्मिक महत्वके रुपमे रहल सावनके डोलाके अस्तित्व संकटमे रहल बा ।
कौनो बेला एकदमे प्रचलित संस्कारके रुपमे रहल सावनके डोला अर्थात हिरोल्ना झुल्न प्रथाके संरक्षणमे कमी ओ आधुनिकताके क्रमसंगे लोप हुइनामे रहल हो ।


प्रायः खेतीपातीके समय सेकलपाछे फुर्सदके समयहे सदुपयोग कर्ना तथा राहरंगी कर्ना प्रमुख माध्यमके रुपमे सावनके डोलाके प्रयोग करजाइठ । मने उ समुदायमे आयआर्जनके लाग औरे काममे बह्रल व्यस्तता तथा आधुनिक मनोरञ्जनके साधनके विकास संगे अस्तित्व संकटमे रहल रानाथारू समुदायके अगुवाहुकनके कहाई बा ।
रानाथारू बुद्धिजिवी तथा पूर्व सभासद मालामति रानाके अनुसार सावनके डोला रानाथारू समुदायके प्रमुख संस्कारके रुपमे रहल बटैली । मने समयके क्रमसंगे लोप हुइलमे भर उहाँ चिन्ता व्यक्र कर्ली ।
ऐतिहासिक पक्षके बारे उल्लेख करटी उहाँ सावन महिनाके अँधरियासे लेके ओजरियाके तेसर दिनसम सक्कुजहनके पायक पर्ना ठाउँमे बनाइल सावनके डोलामे मनोरञ्जन हुइटी आइल बटैली । जौन बेलामे दुर–दुर रहल चेलीबेटी, सँघरियनसे भेटघाट हुइना माध्यम फेन बन्टी आइल बुद्धिजिबी रानाके कहाई बा ।

ओस्तके कुछ बरष आघेसम सावन महिना लागलपाछे पहुनी खवाइक लाग आपन चेलीबेटीहुकनहे अनिवार्य लेहेजाइक पर्ना प्रचलन रहे । जेकर कारण सावनके डोलाके माध्यमसे नातपातहुकनबीचके सम्बन्धमे ताजापन नन्न माध्यम बनल बटैठी धनपा–८ धनगढी गाउँके स्थानीय लालमति राना । उहाँ रातके समयमे थारू–जन्नी आपसमे सामूहिक रुपमे गीत गैना ओ सावनके डोला झुल्न चलन रहल जानकारी देली । उहाँ रानाथारू समुदायके प्रचलनसे हेरैटी गैलमे दुःख व्यक्त करटी संरक्षणके लाग आघे बह्रेक पर्ना बटैली ।

सावनके डोलाके धार्मिक फेन महत्वपूर्ण मानजाइठ । अँधरिया ओराइलपाछे सुरु हुइल ओजरियाके तेसर दिन अर्थात सावन डोलाके अन्तिम दिन हो । जौन उ समुदायमे तीजके ब्रत बैठ्ना फेन प्रचलन बा । मने यी ब्रत आपन थरूवाहुकनके लाग नाई बैठके आपन दादा, भैया, भतिजुवाहुकनके सु–स्वास्थ्य तथा दिर्घायूके कामनाके लाग बैठना चलन रहल जनागिल बा ।
पूर्व सभासद मालामति रानाके अनुसार उ अन्तिम दिन अर्थात तीजके दिन सावनके डोलामे रहल लसरी (पगहा)के मुख्य गाँठ (मुरिया) के पुजा कर्ना प्रचलन बा । ओहे दिन लग्गेक लदिया, डुन्द्रामे जाके विबाहित जन्नी मनै सात ओ अविबाहित जन्नी मनै पाँचठो कुशक गाँठमे पुजा करठै । ओकरपाछे उ कुशके जुट्का (झुरकी) लदियामे पुहैना ओ भैया, भतिजुवनके सु–स्वास्थ्य तथा दिर्घायूके कामना करजाइठ । जेहिसे सक्कु सोचल काम पुरा हुइना जनविश्वास रहल बा ।
आजकाल रानाथारू समुदायमे सवानके डोलाके प्रचलन हेरैलेसे फेन तीजके ब्रत बैठनाक्रम भर जारी रहल बा ।

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