थारू समुदायमे लेहंगाके लोकप्रियता

१८ फाल्गुन २०७७, मंगलवार Hits : 1332
थारू समुदायमे लेहंगाके लोकप्रियता

लखन चौधरी: धनगढी

आदिवासी थारू समुदायके अधिकांश मौलिक लोक संस्कृति, चालचलन हेरैटी गैलेसे फेन भुषभुषाके रुपमे रहल लेहंगाके लोकप्रियता भर दिनप्रति दिन बह्रटी गैल बा ।

टर–टिहुवार तथा कौनो फेन कार्यक्रममे अनिवार्य प्रयोग हुइटी आइलपाछे थारू जन्नी मनैनके पोषाकके रुपमे रहल लेहंगाके लोकप्रियता झन–झन बह्रटी गैल हो । परम्परागत लेंहगाके प्रयोग कम हुइलेसे फेन आधुनिक डिजाइनसे बनाइल लेहंगा जन्नी मनैनके लाग अनिवार्य हुई पुगल बा ।

लेहंगाके प्रयोग हुइना कलेक थारू समुदायमे संस्कृति संरक्षणके लाग बह्रल चेतनाके एकठो उदाहरण रहल दाबी करठी क्रियाशिल पत्रकार महिला कैलालीके अध्यक्ष उन्नती चौधरी । उहाँ हाल प्रयोग हुइना लेहंगा परम्परागत लेहंगासे कुछ फरक रहलेसे फेन डिजाइनदार बनाइल लेहंगाके प्रयोग हुइना कलेसे भुषभुषामे संरक्षणमे धिउर बल पुगल बटैली । ‘टर–टिहुवारमे लेहंगा नैलगैबो टे, टिहुवार मनाइल हस नैलागठ’ उहाँ आघे कहली–‘आजकाल सक्कु जन्नी मनैन ठन एक जोर लेहंगा अनिवार्य रहठ । मने विशेष दिन बाहेक औरे दिनभर प्रयोग नैहुइठ ।’

धनगढी गुरही चौकस्थित दहित टेलर्सके सञ्चालिका दुर्गा चौधरी आधुनिक लेहंगाहे अलग–अलग १० खण्ड जोरके बनाजिना जानकारी देली । उहाँ उप्परसे टरेसम क्रमशः गुम्टी, नेफा, लेहंगा, जिभ्भा, पट्टी, कचौटी, सितारा, गोठ, छुट्की गोठ ओ फुलरा रहना बटैली । उहाँ लम्मा समयसे व्यवसायिक रुपमे लेहंगा बनैना काम करटी आइल बाटी ।आजकाल हर कोई थारू जन्नीहुकनमे कचौटी काटल लेहंगा लगैना संस्कार बैठ्टी गैल बा । टर–टिहुवार होेए चाहे भोजभटेर छोट–छोट बच्चनसे लेके बह्रइल मनै लेहंगा लगैनामे कौनो कन्जुस्याई नैकरल देखजिठै । बरा कलात्मक ढंगसे बनाजिना लेहंगा थारू समुदायमे रहल कलाके अनु्पम उदाहरणके रुपमे रहल बा ।

परम्परागत लेहंगाके प्रचलन हेरैना ओ आधुनिक लेहंगा फेसनके रुपमे आइलपाछे समुदायमे कुछ नकारात्मक असर फेन परल जनागिल बा । सक्कु जाने लेहगा लगैना खुसीके बात रहलेसे फेन परम्परागत लेहंगा लगैना चलन हरैना चिन्ताके बात रहल बटैठी कैलालीके गदरिया–६ बेनौलीके गंगोत्री देवी थरूनी । स्थानीय सोह्रिनिया समेत रहल उहाँ अप्ने छोट्से आजसम परम्परागत लेहंगा लगैटी आइल जानकारी देली । ओस्तके क्रियाशिल पत्रकार महिला कैलाली अध्यक्ष उन्नती चौधरी लेहंगामे आइल फेसनके कारण लेहंगाके बजार मोल बह्रल बटैली । जेकर कारण निम्न वर्गहुकनके लाग लेहंगाके प्रयोग बाध्यत्मक हुई सेक्ना अशंका व्यक्त कर्ली ।

यहेबीच लेहंगाके प्रयोगमे बृद्धि हुइलपाछे लेहंगा बनाके कारोबार करुइयाहुकनके लाग मजा कमाई कर्ना साधनके रुपमे फेन लेहंगा बने पुगल बा । जिल्लाके अधिकांश शहर बजारमे लेहंगा बनैना काम समेत हुइटी आइल बा । दहित टेलर्सके सञ्चालिका दुर्गा चौधरी अप्ने डशिया–डेवारके अवधीमे करिब ३५ लेहंगा बनैना क्रममे रहल जानकारी देली । उहाँ टर–टिहुवारके समयमे धिउर अडर अइटी रहल बटैटी बरषमे ५०÷६० लेहंग बनैटी आइल बटैली । उहाँके अनुसार लेहंगाके डिजाइन ओ प्रयोग हुइल कपडाके आधारमे २ हजारसे ३ हजार पाँच सय रुप्यामे विक्रि–वितरण हुइटी आइल बा । ओस्तके कैलालीके गदरिया–४ स्थित गदरिया बजारमे लेहंगा बनैना काम करटी आइल हरिराम चौधरी लेहंगामे धिउर मेहनत ओ मजा कमाई फेन रहल बटैलै । उहाँ एक जहनहे एक लेहंगा बनैना हप्तौं दिनके समय लग्ना जानकारी देलै ।

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