मोर छोटमनिक् सम्झना

खिस्सा / बट्कुही ६ चैत्र २०७७, शुक्रबार Hits : 149
मोर छोटमनिक् सम्झना

शान्ती चौधरी
मोर छोटे मनिक् सम्झना कुछ फरक बा कहिके महिन लागठ । मोर परिवारके स्थितिफे ठिके, ठिके रहे । मोर डाइके चारठो छाइ तिनठो ठावा बटिस । मै अपन डाइके सबसे छुट्कि हुइटुँ । मोर डाइ महिन पइम कहिके सोचले नैंरहे । काहेकि मोर डाइहे गाँउके सोरहिन्याँ कैह्डेले रहिन कि आप टोर लरका पैंना बिया ओरागैल् । मोर डाइफे सोचल कि आप मै नैपइम् । मोर बर्का आउर मन्ह्ला डाडु हुकनके भोज छोटमे होगैल रहिन् । मोर भौजि हुँकरेफे समयके संगे पैनाहा होगैलंै । जब मोर भौजि हँुकरे पैनाहा हुइल टे एकठो बाट पटा चलल् ।


मोर डाइफे पैनाहा रहे । सबजे अचम्म लगलिन् कि कसिक पैनाहा होगैलिन् । मने मोर डाइ महिन इ संसारमे लनलिन् । मोर बाबा कहे कि छावा हुइ मने मोर बाबाके सपना पुरा नैहुइलिस् । जसिक टसिक डाइ महिन जन्मैलिन् । मोर डाइ जब महिन जन्माइ लागल टे नैसेकटेहे । कठैं बिना साँसलेके घोरवाके छरकि नहंग्बो टे मजासे पाइसेक्ठै । मोर डाइफे उहे करके पाइसेक्नु कहठ् । अट्रा कररासे मोर डाइ महिन जन्माइल् । मै अपन डाइके छोट्की हुइलक ओरसे डाइ बाबाके बिगरल छाइ रहँु । महिन कोनो चिज मन परजाए टे जसिक करलेसेफे उ चिज चाहे । चाहु जहाँसे, जसिक लानके डेउ मोर चन्चले बानि मोर डाडु हुकन मन नैपरिन् । मने मोर हरेक मागल माग पुरा होए । समयके संग मैं कब भारि होगिनु पट्टै नैचलल् । मै जब ५ कक्षामे फेल हुइनु टे मै बहुट रुइनु । मोर घरके सबजे पास हुइल रहैं । मोर छोट्का डाडु कहल नारो आपसे ध्यान डेके पढाइ करिस् । मै डाडुक् बाट मन्नु । मै अइना बरस बहुट मेहेनट कर्नु । मोर मेहेनटके फल अट्रा मजा आइल

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