मोर कसिन जिन्गि

खिस्सा / बट्कुही ११ चैत्र २०७७, बुधबार Hits : 210
मोर कसिन जिन्गि

सुर्या चैधरी
मै एकठो गाउँके सामान्य परिवारमे जन्मल मनिया हु । मोर घरके स्थिटि कमजोर बाट् । मोर बाबा एकठो मेहेट करके खैना किसान हो । मोर डाइ घरहे स्वर्गसे सुन्डर बनैले बाट् । मोर डाइके बिना हमार घर घरनै हो । मोर डाइ बाबा हुकरे जिलके महिन अटरा मजा जिन्गिडेले बाटै । मै वकर कर्जा उटारे चाहम उ फे कम परी । मै जरिब रलेसेफे मोर डाइ बाबा कबु महिन कोनो बाटके कमि नै हो । मोर डाइ बाबा महिन कोनो बाटके कमि नाहुइस कहिके अउरे जहनके डेहारी करे जाइट् । मै छुटि रहु महिन मेहेनट कलक पटा नै रहे । छोट बच्चाटे का ज्या मोर गोचा हुकरे लेहेट मैफे उहे मागु । मोर बाबा जसिक टसिक मोर लाग उ खेलैना लानडेहे ।


मै अपन बल्यकाल हस्टि रुइटी बिटैनु कहपरल् । जब मै सक्कु जाने लगनु टे मै संसारके रमझममे भुलगिनु । मै पढाइमेफे मजा रहु मैं अपन पढाइ १० कक्षा पास कैके आघक पढाइके लाग बजार जाके पढाइ कर्ना मन रहे । मैं बाबा हे कनु आघक पढाइ बजार जाके करना इच्छा बाट् । मोर बाबा एक शब्ड कुछनै कहिके महिन बजार पढाइके लाग पठाडेहेल् । मै अपन डुनियामे रहु कि महिन मोर डाइ, बाबा कसिक महिन पढाइटै उ फे बिसरगैल रहु । मोर पढाइ ढिक ढिक रहे अस्टेक करटी मोर पढाइफे वराइ लागल रहे । तरफे महिन याडनै अनइलकि महिन आब काम करे परल् ।एक डिन मै संधरिया हुकनके संग घुमे गैल रहु टे एकठो मनिया अपन डाइहे मरजा टै कैके गरयाइट डेख्नु टे कसिन कसिन लागल् । उहासे घुमके अइनु मोर मनमे डिनके डेख्ल बाट घुमटहे । साझ हुइलटे मै घरै बाबा हे फोन कर्नु । डाइ बाबा हुकन कनु टुहरे महिन बजार पहरे कसिक पठइलो हमार घरके स्थिटिफे कमजोर बाट टे मोर डाइ कहल टै जोन बाटमे खुसि बाटे हमरेफे खुसि बाटि । मै सोचनु कटरा भग्यमानि हुइटु मै मोर डाइ, बाबा अटरा अप्ठेयाहो मे बाटै टबफे महिन दुःख नाहुइस कहिके अटरा करठैं ।

असटेक मोर पढाइफे वरागिल मै सोचलेहेल रहु अपन डाइ बाबा हे एकठो मजा जिन्गि डेहेम तर बास्टवमे सोचल जस्टो नै रहट् । मै सोच्नु काम मिल जाइ तर मै गलत रहु । मैं बहुट ठाउँ काम के लाग कोसिस कर्नु । तर मोर सोचल जस्टो काम नै मिले मैं रोज प्रयास करु तरफे फेल होजाउ । डिन भर का करु मोर कोठामे संगे बैठना मोर संघरिया रहे ओकर ल्यापटोप मे डिन भर टाइपिङ करे सिखु । उहे समयमे मोर जिन्गिमे एकठो लैढि मन परगिल् । डिनमे उहिनसे बाट करु महिन अपन जिन्गिमे कुछ बन्ना रहे उहे कारनसे मै घरेफे नै जाउँ । मोर बाबा महिन घरे बहुट बलाए घरे टर मैफे कुछ सोच रहु । मैं अपन जियफ से सहयोग मागु उ काम करीन । तर हुककारफे अपन परिवारमे समस्या रहिन् । मै जसिक टसिक करके कोठा भारा डेनु । घरेसे रुपँया कसिक मागु होगिल रहे । मैफे अपन ओहोरसे काम खोज्ना बहुत कोसिस करटहु । आब टे घरे नैगिलेसे काम नैं बन्ना रहे । टे एक डिन मै सोचनु कि आज घरेजिम् । मैं वकरेहेक अउरे बिहानके गाँउ जाइक लाग निकर गिनु । घरे गिनुटे डाइ, बाबा हुकन डेख्नुटे महिन बहुट खुसि लागल् । मैं सुटल रहु टे मोर गाँउके संघरिया मोर घर आगैल् । महिन घुमे जाइ गाँउ उहोर कहल टे मैंफे अपन मनहे हल्का करक लाग घुमे गैगिनु । घरे औनुटे महिन लागल् खोटि करके अपन डाइ बाबा हुकन पालम । एक ओहोर मोर भाटु महिन भोजके लाग कहैं ।


तर महिन अपन घरके स्थिति सुधरर्ना रहे । कसिक करके मोर घरहे मजा बनाइ सेकम महिन नैं पटा रहे तर अतरा भर पटा रहे मै एक डिन अपन घर मजा बनाके छोरम । हमरे संसारमेटे औठि टर अटरा मेहेनट कैके खाइ मिलि पता नै रहट् । किउँ मनै बहुट हालि हार मानलेठैं । तर मै कठु अटरा हालि हार काजे मन्ना मनैंनके जिन्गि हो । अटरा सजिलोसे कसिक कटि हरेक काम के लाग मेहेनट चाहट् । जो हार नैं मानल आजके युगमे ओकरेहेक जिट बाट् । मै कठु किउफे अटरा हालि अपन जिन्गिसे हार ना मनहो । धन्यवाद ।

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