डाडा भैयक् सम्बन्ध

खिस्सा / बट्कुही ५ बैशाख २०७८, आईतवार Hits : 156
डाडा भैयक् सम्बन्ध

पहिले जवानक् बाट हो । डाडा भैया हुक्रे घर फुटल रठैं । कुछ दिन बाट डाडाके भोज हुइठिन । भैया मनैयाँ कहट कि मै फेन जाउ अपन डाडक् भोज खाइ । डाइ कठिस छावा टोहाँर डाडक् नेंउटा नाइ डेले हो टे काहे जाइटे ? भैया मनैयाँ कहठ् कि मै फेन डाडै भोजेम् कुछ डान डछिना डेम कहिके कहठ । भैया मनैयाँ नाइ मानके चल जाइट । मने उहिन कोइ नाइ पुछ्ठिस् । उ ओसरहुवामे जाके बैठल रहठ । एक घचि रहिके डाडा बाहेर अइठिस टो अपन भैयाहे डेखठ ओसरहुवामे बैठल । डाडा कठिस टुहिन यहाँ के बलाइल रे ? भैया मनैयाँ कहठ महिन कोइ नाइ बलैले हो मै अप्नेहे अइनु । डाडा कहे लगठिस टैं यहाँ से चलजा टुहिन केउ नाइ बलैलेहो । भैया मनैयाँ उहाँसे आइ जाइठ फुस्सर ढेबर लगैले ।


उ खेटुवा खेटुवा नेंगटि आइठ । खेटुवामे चना बोइल भेटाजाइठ । मोरे दादाक चाना हो १÷२ डाँठ उखार लिउँ खैटि चलजिम कहठ । चौकीडरुवा डेखलेठिस । चौकीडरुवा कहे लग्ठिस । रे के हो रे ,चाना उखार्टा ? भैया मनैयाँ कहठ मोर दादाके खेटुवा हो । मै सोच्नु १÷२ बोंट उखार लिउँ खैटि चलजिम । चौकीडरुवा फेनसे कहठ नै नै टुँ चाना नाइ खाइ पैबो ? चाना यिहैं छोरडेउ । काकरि विचारा चाना फेन ओट्ठेहे ढारके चलजाइठ । फेनसे उहाँसे चलडेहठ । एक घचि रहिके अपन घर पुगठ । ढाइ कठिस छावा भोज खैलो कि नै अपन डाडुके ? भैया मनैयाँ कहठ डाइ महिन टे वहाँ कोइ नै पुछ्नाइ ? डाइ कठिस कनु टो नै जा कहिके टैं बाट नै मनले ।


अब असिक नाइ बनी । मोर लग टनिक ढेरे रोटी पकाडेहो, मै जिम आब अपन करम खोजे । तब घरसे निकार जाइठ । जहाँ रात हुइठिस ओहैं रोटी खालेहे । उ फेनसे जाइठ जाइठ एक घचि रहिके पिपरक् रुखुवा ठन पुगठ । पिपरक् रुखुवा कहठ कहाँ जाइटो टो टुँ एकठो मोर दुख बा, टोहाँर आउर दुख बा ? उ कहठ मै अपन करम खोजे जाइटँु । पिपरक् रुखुवा फेनसे कहठ मोर बारेम टो पुछ डेहो ? का हुइल बा ? एक साल एक हरयर होजिठँु टो एक सुखजिठँु । यिहे बात पुछ टो डेबी कहठ ? उ ठिक बा पुछ डेम कहठ । वहाँसे नेगडेहठ ।

जाइठ जाइठ लडियक् किनारे पुगजाइठ । खेछ्चुहियाहे डेखलेहठ । घनु पानीम जाइठ घनु ढिकुवम् आइठ । खेचुहिया कहठ एक टो दुख मोर बा, टँु कहाँ जाइटो प्रदेशु ? मै जाइटुँ अपन करम खोजे । एक दुख टो मोर बा, टोहाँर आउर दुख बा । ए ठिब बा टो । मोरो टो पुछ डेहो कि का हुइल बा । ना पानीम् रहे सेक्ठुँ ना ढिकुवम् । ठिक बा मै पुछ डेम कहठ । वहाँसे फेन चलडेहठ । जाइट जाइट उ सहर पुगजाइट सेठुवक् घर । प्रेदेशु टुँ कहाँ जाइटो मै अपन करम खोजे जाइटँु । ए टुँ करम खोजे जाइटो टो मोरो टो पुछडेहो का हुइल बा । दिन भर लेबर , मिसतरी लगा लगा मकान उठैठुँ । रातके लड लड गिरजाइठ । यि बात पुछ टोे डेबी । ठिक बा पुछडेम कहठ । बस वहाँसे फेन चलडेहठ । जाइट जाइट एकठो लडियक् किनारे मन्दिर रहठ । उहे मन्दिरमे अपन डेरा ढारलेहठ । रात होजिठिस । उहिन मन्दिरमे सुटल डेखलेठिस । भगवान पुछठिस कहाँ जाइटो मुसफार । उ कहठ अपन करम खोजे जाइटँु । मोर कोइ फेन नाइ हुइटैं । मै आउर मोर डाइ किल बा । सिरिफ दुइ जे किल बटी ।

टँु यहाँसे घुमके चलजाउ टोहाँर सब बनजाइ । एकठो सहरमे एक सेंठ बटैं । दिन भर लेबर मिसतरी लगाके मकान उठैठैं रातके लडलड जिरजाइठ । ओकार एक्ठो छाइ बटिन ओकार भोज चाहा जिहिनसे कराडिहि टो हँुकार सब पुरा हुइटि चलजिहिन । एक्ठो बा खेचुहिया ना पानी रहे सेकठ ना ढिकुवम । ओकार पेटके भित्तर बहुत सोन चाँदी बटिस उहिन चिरके फेकाइ कैह डेहो तब उ मजासे रहि । एक्ठो बा पिपरक् रुखुवा एक साल डहिका हरियर हुइठिस ओ औरे साल सुखजिठिस । ओकार जरके टरे बहुत सोन चाँदी बा उहिन कोरके फेकाइ कैहडेहो टो तबसे उ चारु ओर हरियाइ लागि । ए ठिक बा कैहडेम । वहाँसे आइ लागठ ।


आइट आइट सेंठके घर पुगजाइठ । प्रदेशु का खबर नन्लो मोर ? अपन छाइक भोज टुँ चाहा जिहिनसे करा डेउ टो टोहाँर सब पुरा हुइजाइ । सेंठ सोचठ किहिन डिउँ किहिन डिउँ टुहि लै जाउ । सेंठ हुँक्रे पुरीउरी पकाइ लगठैं । अपन छाइक् भोज करडेहठ । प्रदेशु लेले आइ जाइठ । आइट आइट खेचुहियक् ठेन पुगजाइठ । का खबर नन्लो प्रदेशु मोर ? टोहाँर पेटके भित्तर सोन चाँदी बा । उहिन चिरचारके फेकडेउ टुँ । टबसे मजासे रहे सेक्बो । खेचुहियक् कहठ किहिन डिउँ किहिन डिउँ टुहि लै जाउ चिरचारके सोन चाँदी । उ चिरचारके नानलेहठ । खेचुहिया मजासे पानीम रहे सेके लागठ ।


तब वहाँसे फेन नेंगडेठैं । आइट आइट पिपरक् रुखुवा पुगजिठैं । पिपरक् रुखुवा पुछठ । का खबर नन्लो मोर लाग ? टोहाँर जरठें बहुत सोन चाँदी बा उहिन कोर कारके फेंकडेउ तँ,ु तबसे चारुवर हरियाइ लगबो । पिपरक् रुखुवा कहठ किहिन कोरे कहुँ किहिन कहु । टुहि लैजाउ कोर कारके सोन चाँदी । तब उ कोर कारके नालेहठ । डोसर सालसे चारुवर हरियाइ लागठ । उ वहाँसे फेन नेंगडेहठ । आइट आइट उ अपन घर पुगजाइठ । अपन डाइहे बलाइठ, डाइ डाइ बाहेर निकार टो के आइल बा । डाइ निकर्ठिस बहुत खुशी लगठिस । अपन डाइहे ढोग सलाम लगठैं । घरक भित्तर चलजैठैं । उ महल बनाइ लागठ सब चिज पुरा होजैठिस । खिस्सा ओरागैल ।

सन्जीब चौधरी
टीकापुर–९ झुँगा, कैलाली

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