फुल्मटीक् हरयर चुरिया

खिस्सा / बट्कुही २७ बैशाख २०७८, सोमबार Hits : 257
फुल्मटीक् हरयर चुरिया

बुक्राहा घरेक बिटिया बाबा जिम्डरवक् घर कमैयाँ
डाइ बुक्रही । डु ठो दिदी एकठो डाडक् टरेक् चौठी
सन्तान रहि फुल्मटी । जुनेक् जुन साँटिक बद्ला दरिया निहिनके खाइक परना उहिनेसे पेट भरेक परना हाँ इहे घरेम जलम हुइलिन फुलमटिक ।

कुछ साल अस्टेक बिटल । दुई दिदी एक डाडक् पाछे फल्मटिक पाला अइलिन बिदा लेना दिन । आखिरमे फुल्मटी डोसर घरेक बनगैली । डाइ बाबनके राजि खुसिसे अपन राजि खुसिसे । अखिस खाइक् भरिक जग्गा जमिन रहल घरानामे खाइ लगाइक् लाग झुन्झुवाइक नाइ पर्ना । एकठो दिदिक टरका ओ एक्ठो बाबुक् उपर्का डु लवँरियनके बिच्चेक डुल्हा पैलिन । चलन अनुसार डुनु घरेक हाल बुझ्के सामान्य खानपिनमे निपट्गैल ।

रातके नम्मा सिहरावनसे उठ्के भिन्सहरे
सौनी कोइलरियक अवाज संगे चुल्हा समहर्लि । उहे दिनसे जीवन भर्के लाग भन्सरिया बन्ली फुल्मटि । जस्टेक अपन घर अपन जलम करम डेहेल डाइ बाबा दिदी दादा सक्कुहुन त्यागके आइल रही फुल्मटी ।

ओस्टेके अपन ठरुवक् घर ओ अपन लावा घरके हर किल जोट्ना छोरके सक्कु काम कैली । धानेक लाड बनैनासे लैके खर्ही सिर्जैना घाना डर्नासे लैके मुरिफोर्ना फल्कैना माली डाँइबर बेंररीसम बिन्ली । खेत्वा कुल्वा कोर्ना, कमैना, छँट्ना बन्नाह जैसिन फर्हुवक् सक्कु काम । घरेक आँजर पाँजरके बारी बेंउरा छप्रा छैनासे लैके घरेक पुरे काम कैठिन । खुसी बटैं ससुइया ससुरुवा । जिट्ले बटिन सक्कुहुनके मन । गरगोटियार गाउँक घरेक सक्कु मनैनके । पहिले टो ठोरठार लगाब मैयाँ पिरेम अक्कल झुक्कल डेखमिले आब टो छिन्नो भर नाइहो । बिचारी फुल्मटि जेकरलग अपन दुनियाँ त्यागके आइल रहि उ डोसर दुनियँम् रमाइ सिखगैल बा फुल्मटिक गोस्या । उहिन लौराहस् लग्ठिस । उहिन अपनहे अपनही पटा रहिके ओस्टे बद्लाबके मतलाब राखठ । पता नाइहुस मै भोज कैके डु ठो लरकक् बाबा बनरख्नु । आब मोर टो अस्टे हो ।

लर्कनके भबिस्यक् बारेम सोच्नामे उहिन अपन जिम्मेवारी नाइ मानठ । उहिन इहे दुनियाँ प्यारा रहिस संघरिया रहिस सब । घरसे सडिमान बारुमास कमाइ जाइटुँ कहिके बहरे बहरे रना । कमाही एक्कुनाइ डाइबाबन् जन्नी लर्कन डेखैना। छाइ लर्कक् अलोप कैसेक्ली टबेक मारे हुइसाइट फुल्मटी अपन हरेक सपनाहे कुचिल्के छावक् आवस्यकता पुरा कर्ठी । गोस्याके चाल डेख्के परिसान रहि । ना कलेक ओनैना ना कोनो केक्रो बात मन्ना जत्तिके अस्टे मनैन कहठुइही बिग्रल । कब्बु एक रुपिया कमाही नाइ मङ्गली ना कोनो कब्बु चिज । बस उ अत्रै सोंचि की हम्रे सक्कुजाने खुसी ओ सुखी रहि । मै रहठ घरिम् इ घरेक कोनो सदस्यन किहिनो फे निहिनके नाइ मिठ खाइ नापरे मोर ओरसे किहिनो कोनो किसिमके बाधा अर्चन नापरे ।

घर सुन बा घरेक मनै घरेक ससुरुवा ससुइया औरे कामेम चल्गिनै । छावा छेग्री लैके उ पुर्बेक उत्रेक कोन्वाओर भेंरौहोन संग चलगिल । घरे बटी अक्केली फुल्मटी । साँहिजुनिक बेरुवा घामेम ठर्हियाइल सोचके । भुक्रुकसे डुवार उभुक्के घरेम पेल्ली घरे मन्से मुरिम छिटुवा ओ हाँठेम् भैसपुजुवा हँसिया लेले निकरली ओस्टेके डुवार लगाके बारिओर जाके छिटुवा भर घाँस काटके नान्के बुसेहलम् ढरके भैँसन पानी पिवाके खुँटीम् बहान्के डु उँकुवार पैँरा पैरुटिया मनसे चिंठके डर्ठी । काटल घाँस खन्डरके लर्हियामे मल अकेली भर्ठी । भर्के अक्केली लर्हिया मचियाके बगाइजैठी । आँउ बाउँ अक्केली बगाके अन्ढार घर पुग्ठी । सानि लगाके सेकटी किल ओहोर सुबर्वामे घेंटरवा चेंछुचेंचु घुँइघुँएए बोलठ खैना मागठ । बम्मा
पुगल भाँरा छनामन ओस्टे बा । सानिबुसा कैके खुड्रा
डारके डोसुर कामेम् व्यस्त हुइठी । घरेम झुन्ना नाइ
बरल हो ।

आँजर पाँजरके घरेक बेरि तयार हुचुकल
हुइहिन। चुल्हम भात बैठाके एक्चो सम्झठी ।
आझ मै उहिन काल्हसे संगे घुरौरा मनिक मल
बगाइक् कहम संगे बगाप टो हली हुइ । अप्न्ही
झस्कठी अप्ने गोस्याहे अत्रा बात कना उहिन
हज्जारौं चो सोचे पर्ठिन । इहिन्से पहिले कयोचो
अस्टे कामेम चिजके बारेम कहेबेर उहिनेसे झग्रा हुसेकल बटिन । उ सोझे कहठ कर्नास मन लागि टो करिस नैटो जहाँसे अइले ओहैं चलजाइस । ओस्टेफे महिन टोर जरुरत नाइहो ।

तनाबके सामना करेक पर्ठिन । एक बातके लग सवासन बात सहेक पर्ठिन ।ससुइया ससुरवा जत्रा
मजा मन्लेसेफे अपन मनैं संगे नाइ टो आउर कोइ नाइ । गैलबेर कयोचो इहिन्से पहिले अस्टे परिस्थितिक सामना कैसेक्ले बटी फुल्मती ।
अप्ने भित्रे भित्रे कम्जोर हुइलेसेफे दाँत गिज्राके हिम्मत कस्ठी । उ हिम्मत पलभरमे डर ओ उडासमे बडल जाइठ । डुनुहाँठ सिकुरके कुठलिक अडेस लैके लगातार आँश गिरे लगठिन । उ रोइ लग्ठि उहे भन्सामे । आँसके ढार बहटी जाइठ हुँकान आँखिमसे । जस्टे की कुछ साल पहिलेसे बहटी आइल रहठ ।
आत्मा हत्या कैना फेन सोंच्ठी ।अपन सन्तान जेकर आसेम् दुखेक् आँस सुखट उहे उहिने सम्झठी । डाइक् टरपावनमे लर्कक का दोस रु उहिन खाना पिनाके डिहिस ओकर लट्टा कपरा के ढोडिहिस रु सँप्राके स्कुल के पठाइ रु ओकर बाबा रु मौन हुइठी एकघची । अपन सन्तान अपन खुन अपन सरिरके अंग । कैसिके मै असिक करम । कैसिक इहिन्से दुर हुइम । अस्टे अस्टे बात सोंचके मनमे एकाएक आँस समिया जैठिन । उ होसमे अइठी । गाल सक्कु सुखाइल रहठ आँखिक छ्टपटाहट दुर हुइठ । उ वास्तविक मे खहरैठी सपनक् भारी भारी पहार चर्हे लग्ठी । तर दुख दुखे टो बा बा जिवनमे ।

जबकी इ सृस्टी कर्ता भगुवान इसरु महाडेउ गौरा
पार्बती अत्रा दुख कैनै टो मै काहुँ । मैफे खैम दुख
ओ निभैम । रात पाछे बिहान अवश्य हुइठ । अस्टे घेलबिछेल बातबातेम आउर दिनहस खापिके
ओस्टे कट्जाइठ । आझ टो कटल मनो जिन्गि टो
नम्मा बा बहुत नम्मा । छावइ पर्हैना लिखैना बा ।
ससुइया ससुरुवाके सेवा सुसार कर्ना बा ।अपन अपने गोस्याहेफे मजा डगरके यात्रा करैना बा ।अत्रा सक्कु करेक लग का मोर इ डु चार उँन्ज्रा सास ओ आस पुगि रु अँहँ नाइ हो अत्रा सक्कुहुन पार
लगाइक लग महिन आउर साँस जुटाइ परि । मने मन
तम्तयार हुइठी फुल्मटि । नम्मासाँस लैके साँसके संगे
आस ओ भैंकर बिस्वास जुटैठी । एकचो तनमन पूरा
होसमे कठी अँह्ँ मै किहिनो ढोखा नाइ डेहे सेकम ।
अप्ने गोस्याहे खुसी नाइ पारेसेक्लेसेफे उहिन सेवा
करना अपन जन्नी हुइलेक कर्तव्य पुरा करेकलग
उहे कामहे फेन्से निरन्तरता डेठी । जस्टे कि पहिलिही
छरिड्डेमे कर्टी आईल रहि । लुग्रा फाटा समयमे ढोडेना
जबसम गोस्या नाइ खैलेसे अपनेफें नैखैना ।

घरमे आइल गैल पहुना पाछर हेर्ना खवइना पिवइना होए टो नाइ खाके कयो रात बिटासेकले बटिन । फुल्मटिक उ बात पुरान हुइलेसे फे उ कस्टोक डोसर नाउँ मैंयाँ डेके उ सन्तुस्त बटी । औरेबेर घरसे दुर कमाके खैना उरैनाटो परल रहे । आब सम्भव नाइहो लकडाउनमे दुरदुरसे प्रदेशी प्रवासी ओइने अपन घर लौटगैल बटैं । घरसे बाहेर निकरना मनाहि बा बाहेर घुम्ना नेंग्ना कररा बा । सक्कुहुन पटा बा । छोट लर्कासे लैके बुह्रा बुर्ही टक । लाटसे लैके बहिर टक आँढरसे लैके ढिठार टक ।

गाउँ बजार सुनसान बा । पक्किरोड भँयाँइटा ।
ओराइटा असार । परटा सावान बालुवातारके ।
सोझे पच्छिँ डलबड्रान घरेक पाछे कमला
डंगौरक् खेतुवा लगाइ जैठैं । बन्दके सौँसेटल
पैंसक् डारि गाउँभरिक हस मेढारु मजुरी
जैठैं । गैल साल दाङ, बाँके, बर्दिया, कैलाली कंचनपुर इ पाँच जिल्लक् किसानन् गरिमा धान
मज्जासे ढोखा डेहेल। थाह्रे रहिगैल नाइ फुलल
फरल । सरकार इ धान लगुइया किसानन् राहत
डेना बात कानेमसम किल पुगल । पाँच जिल्लक्
किसान इ प्रकोपसे बहर्टी गैल महंगाइके सामना
करेक लग अपन घरपरिवारके पेट काटके गल्ला
गिराके अइना दिनिक लग सामामे जुट्नै। सुनवाई
नाइ करल नेपाल सरकार ना स्थानिय सरकार ।
बरस्टी रलिन किसाननके माठेमन्से असार ।

खेतुवइमे कलुवा खाके अभिन भिज्ले हाँठ
रहि फुल्मती । फोन आपुग्लिन । हिल्लहे
गोर किस्निन्याँसे डु हजार रुपिया मांगके
गौहिक् मोटरसाईकिलमे पठ्लरहा खोजके
लेवा मन्से उँचियाके लम्की चोकमे एक घण्टामे
आँश पोछटी हिल्लहे गोर पुग्गिली । टबे आइल एम्बुलेन्स हँकसे रोकल ओमहि रहिन फुलमतिक् सेँदुर रक्टे रोहन ।बेहोस सारा कप्परामे चारुवार ताँका लागल । सेर्हल मेरहल । सक्करे पाँच बजे टो घरेसे निकरलो का हुइल कैसिक हुइल रु अपन गोसियहे कानुमे लैके खोबसे रोइ लग्ली खोबसे ।

एमबुलेन्सके रप्तार हुइटी कोहलपुरके
मेडिकल कलेजमे भरटी कर्ठी । लकडाउनके
बेला हाँठेमे सिरिफ दुई हजार रुपिया कैसिके
मै इहिन बचाउँ रु आँश नाइ रुक्ठिन फुल्मतिक ।
चेकजाँच पाछे कप्पारमे खुन जमल बात
बटैठैं डाक्टर लोग । पैसा लाखौ रुपिया खर्च
हुइना ठहरठ् । अपन नाटपाँटन संघरियन मोर अइसिन समस्या पर्गिल महिन पैसक् बहुत जरुरत बा कहिके सहयोग मँगठी । बर्खा बुँडिमे केकरठन्
कहल हस रुपिया रहि । उफे लगडाउनके
ट्याममे । एकदुई कैके जुटैठी । सिटिस्केन कर्के दवाई जारी रहिन । होसमे अइठिन फुल्मटीक गोसिया । आस ओ माग भगुवान सुन लेहठ साइट । कुछबेर रहिके होसमे भेटैठी । होसमे अइठिन टे डाक्टर कहठ अप्रेसन नाइ करेक परि कना
खबर सुनैठैं । बेरहमियँक खुन लैके भिजल
कपरा बद्ले कठैं । पाँच दिनिक कठिन
बसाइके बाड गोस्याहे लैके घर लौट्ठी ।

फुलमती सेवा सुसार कर्टी दिनेदिन टेंगनार
करैठी अपन गोसियाहे । टल्हुक असार ओराके सावन लाग जाइठ । हाँठेमे गाँठि बहन्ना पैसा नाइ
रहिजैठिन । संगे मजुरी करुइयनके हाँठे
भरभर हरियर चुरिया रठिन । खाली रठिन टो
बस फुलमटीक् हाँठ छुछ्छे । मजुरी जैनासे
पहिले अपन गोसियक् ठन बटैले रहि फुल्मटी
मजुरी करल पैसा लैके हरियर चुरीया घल्ना बात ।
मने उ बात ओस्टे खर्बास हुइलिन । कोहोंरसे
दिन जामल उहे दिन । फुल्मटीक गोसिया कलिन
याद करटी माफ करहो फुल्मटी मोरे
ओरसे टोहाँर हाँठ छुछछे रहल । पन्जरे बैठल
फुल्मती अपन गोस्याहे सिमोट्टी कलि
जीवन भरके मोर हरयर चुरिया टुँही होउ, टुँही होउ ।
लाछु डंगौरा
टीकापुर कैलाली

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