किटो लागी, नैटो भागी

सर्दिमे सन्टोला खाइ देहबेर, खाउ किटो लागी, नैटो भागी

लेखक:- प्रतिक्षा चाैधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

हे भगवान ओइनहे ना परच्वाएउ

पहिले टे सिरिजल, जलथल ढरटी ।सिरिजीटे गइलाहो कुसकही डाभ ।।हुइनाटे मै गल्ती फेन हो सेक्ठुँ । लकिन मही महा अचम्भ लागठ कि यी पृथ्वीके उत्पत्तीके पुरा इतिहास


भाष्कर देव चौधरी

समानता, शिक्षा ओ रोटी

मनै मुअक टे जर्मलक नै हो, बेन जियक टे जर्मलक हो । प्याट केल पालक टे जिना टे संकिर्ण वा घिनलक्टीक विचार हो । अ‍ैसिन घिन लक्टीक विचारह ठाउँ देलसे मनै उन्नतिम


शत्रुधन गोचाली

अपन लइकन सु–संस्कारवान बनाएक जरुरी

समयके गति अपन धुरीमे बहुट तेजीसे आगे बढतबा । एके केउनाई रोक पाई समयके गतिके साथ साथे हर एक चीजमे बहट तेजीसे परिवर्तन हो रहलबा । पहिलेक समय आउर अबके समयमे बहुट


श्याम सिटी