घरेम गुडि भाङ नै हुन कुक्कुर पादे चुउरा

सोहैना समय,ठाउ,विषय बस्तु,परिवेश अनुसार,थारु समाज मे पुर्खा पुरनिया से बोली बचन मे प्रयोग हुइति आइल धेउरे कहकुत मनसे एकथो यी फेन हो । जब कोइ आपन औकात से बाहर हुके कुछ काम करे खोज्ना , देखाइ खोजना , मनेकि आपन घरेम कुछ नै जुहैले से फेन अलान हो, फलान हो ,यी करम उ किनम कहके बतवैना ,ओ ऋण,सापटि कैके फेन देखौति रुप मे करके देखाइ खोजल अवस्थाम यी कहकुत ंघरेम गुडि भाङ नै कुक्कुर पादे चिउरा कहके प्रयोग करे सेकजाइथ ।

लेखक:- रबिना चौधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

‘डुटिया’ ह्यारबेर

जब मनै इ ढरटिम पहिला पैला ट्याकट टबसे वाकर जिनगि जिना संघर्स सुरु हुइट । आपन जिनगि जियक लाग संघर्स कर भिरठ् । संघर्स कर्ना क्रम म समय ओ परिस्ठिटि लेख वाकर


पुनाराम कर्याबरिक्का

गजल

का कमि रहे हेर्ना उ नजर भुलाडेलो ।साँझके सिटरैना उ नहर भुलाडेलो । दुई मुटुके मिलन हुइना गुरही चोकमे,मोर घरे ओर अइना उ डगर भुलाडेलो । टँु मोर मैया प्रेमके बहियाँमे


विश्वदेव चौधरी

गजल

जहर डंगौराजान पहिचान, मनैनके जवानी हो ।जिन्गी सँचमे, समुन्डरके पानी हो । मन लग्ना पिना, करठै बहाना मनो,टेन्सनमे खैना पिना, केकरो बानी हो । छोरना बा सब, आइ जब


जहर डंगौरा