जब्बे खैना पिना तब्बे बाबाक लेहे अ‍ैना

थारु समाजमे पुर्खापुरनिया से बोली बचन मे प्रयोग हुईति आईल धेउरे कहकुत मनसे एकथो यी फेन होवै ।

जब कोई कुछ मजा काम खोब मन लगाके करती रहथैं , ठिक उहे समयमे कुछ कारणवस् उ काम करे नै सेक्ना मनेकि कहु जैना होजिना, बलौवा अजिना कलसे उ समय यी कहकुत “ जब्बे खैना पिना तब्बे बाबाक लेहे अ‍ैना ं” कहके प्रयोग करजाईथ ।

उदाहरण के लग अब्बा भरखर अपनेन के थारुन के डट कम खोलके हेरती , सिखति अपनेनहे मनपरल ठिक उह समयमे लाईन चलगिल या मोवाईल के व्यट्री ओरागैल कलेसे यी कहकुत कहे सेक्थी ।

लेखक:- रबिना चौधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

‘डुटिया’ ह्यारबेर

जब मनै इ ढरटिम पहिला पैला ट्याकट टबसे वाकर जिनगि जिना संघर्स सुरु हुइट । आपन जिनगि जियक लाग संघर्स कर भिरठ् । संघर्स कर्ना क्रम म समय ओ परिस्ठिटि लेख वाकर


पुनाराम कर्याबरिक्का

गजल

का कमि रहे हेर्ना उ नजर भुलाडेलो ।साँझके सिटरैना उ नहर भुलाडेलो । दुई मुटुके मिलन हुइना गुरही चोकमे,मोर घरे ओर अइना उ डगर भुलाडेलो । टँु मोर मैया प्रेमके बहियाँमे


विश्वदेव चौधरी

गजल

जहर डंगौराजान पहिचान, मनैनके जवानी हो ।जिन्गी सँचमे, समुन्डरके पानी हो । मन लग्ना पिना, करठै बहाना मनो,टेन्सनमे खैना पिना, केकरो बानी हो । छोरना बा सब, आइ जब


जहर डंगौरा