दिन के एल्हो मेल्हो, रातके जोनहियाँँ लेके सुकहुन सुखवैना

थारु समाज के बोलीबचन मे प्रयोग हुइति आइल धेउरे कहकुत मनसे एकथो यी फेन होवै ।

जव समय रहना ते यहोर ओहोर करना,घुम्ना, काम करेक पता नै पैना , जव उ काम के समय आरैना तव हडबड हडबड करे जैना,जैसिक हुइलेसे फेन ओकर वैकल्पिक डगर खोजके फेन उ काम ओरवाइ खोज्ना ठिक ओहे समय मे दोसर जे यि कहकुत कहे सेकथै। “दिन के एल्हो मेल्हो, रातके जोनहियाँँ लेके सुकहुन सुखवैना ”

लेखक:- बिना चौधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

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