नाचे जन्ना नै हुन, महतान अँगना तेंह्र

हमार थारु समाज मे सामान्य बोली बचन मे प्रयोग हुइति आइल कहकुत मनसे यी फेन एकथो हो । जब कोइ कौनो काम करेबेर , अपने ऊ काम के बारेम अनभिग रहना , मनेकी ऊ काम करे नै जन्ना , काम करति करति बिगार धरना कलेसे पाछे दोसर जनहन हे दोष लगैना । दोसर जनहन के कारण या कौनो चिज के कारण काम नै बनल कहके बात बनैथैं कलेसे ऊ अवस्थाम कोइ दोसर जे  कहेसेक्थैं कि, नाजे जन्ना नै हुन महतान अँगना तेंह्र ।

लेखक:- थारुनके

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

‘डुटिया’ ह्यारबेर

जब मनै इ ढरटिम पहिला पैला ट्याकट टबसे वाकर जिनगि जिना संघर्स सुरु हुइट । आपन जिनगि जियक लाग संघर्स कर भिरठ् । संघर्स कर्ना क्रम म समय ओ परिस्ठिटि लेख वाकर


पुनाराम कर्याबरिक्का

गजल

का कमि रहे हेर्ना उ नजर भुलाडेलो ।साँझके सिटरैना उ नहर भुलाडेलो । दुई मुटुके मिलन हुइना गुरही चोकमे,मोर घरे ओर अइना उ डगर भुलाडेलो । टँु मोर मैया प्रेमके बहियाँमे


विश्वदेव चौधरी

गजल

जहर डंगौराजान पहिचान, मनैनके जवानी हो ।जिन्गी सँचमे, समुन्डरके पानी हो । मन लग्ना पिना, करठै बहाना मनो,टेन्सनमे खैना पिना, केकरो बानी हो । छोरना बा सब, आइ जब


जहर डंगौरा