मुह मे राम जुहारी साइड छुरी कतारी ?

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जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

भाषिक मृत्युसंगे पहिचानके सवाल

भाषिक मृत्युसंगे पहिचानके सवालएक जाने कले रहैं, महिन हेरके कोइ मै थारु हो कहे सेकी ? मोर पहिरन हेरलेसे आधुनिक समय अन्सारके कोट पाइन्ट लगैठु । आब अप्नही कहि


उर्मिला गम्वा थारु

मुक्त कमैया थारु, परम्परागत पेशा ओ प्रभाव

मुक्त कमैया थारु, परम्परागत पेशा ओ प्रभावकमैया प्रथा पश्चिम नेपालके दाङ से कंचनपुर सम फैलल डास प्रथा जस्टे हो । कमैया विशेष कैके घरके काम ओ खेतीपाती कामके


अन्जेल कुश्मी

थारु बोली जट्टिक उसिट लागठ, का ?

थारु बोली जट्टिक उसिट लागठ, का ?जबजब आँग ढिकठ, जिभ स्वाद नैपाइ लागठ, टब लिरौसीसे अन्सार लगाइ सेक्जाइठ कि जिउ चुम्मर नैहो, जीउक भिट्रि पुर्जम कुछ ना कुछ गरबर


शेखर दहित