थारु साहित्य

कपिलवस्तुहे चिठ्ठी

प्यारी कपिलवस्तु ! ढेर ढेर सम्झना ओ डन्डुर डन्डुर मैया बा कैलालीक् तरफसे । आधा बरस होगैल कुछ हाल खबर नै पठैले...


सागर कुश्मी “संगत”

जय राम जी की । तोहार प्यारा कैलाली सागर कुश्मी “संगत”

सागर कुश्मी “संगत”

दो नम्बरी भरभट्टामे एक दिन

हुईना टे शहर बजार ओर दो नम्बरी गाडी नाई चल्लेसे फेन गाउँघर ओर अभिनसम लुकछुपके यि मेरिक गाडी चलल् देखजाईठ् । अकसर...


– राम दहित

– राम दहित

– राम दहित

डक्टरुवा ओ बिरम्ह्या

चुटकिला

एकठो बेराम मनैया डक्टरुवाक थन गइल,उ मनैयाहे रहिस हेग्नी पकर्ले !डक्टरुवा : का हुईथ बिरम्ह्या : महिन हे हेग्नी...


- सुबास चौधरी

- सुबास चौधरी

- सुबास चौधरी

अन्ध्रा ब्वायफ्रेण्ड

चुटकिला

एक ठो लवण्डी अपन अन्ध्रा ब्वायफ्रेण्ड हे कहल : “कास तु महिन देखे सेक्तो मै कतना सुग्घुर बातु ।” ब्वायफ्रेण्ड...


- जितेन्द्र चौधरी

- जितेन्द्र चौधरी

- जितेन्द्र चौधरी

हसैना बात चित

चुटकिला

मनरखना ओ मनरखनीनके आपसमे बातचित हुइति रहिन यहे क्रममे : मनरखना :- यार दार्लिंग अतरा दिन संगे लेगली घुम्ली मोज...


दिपेन्द्र चौधरी

बौनियाँ ८ कुमारी बाघ कैलाली साभार ओ सुधार दिपेन्द्र चौधरी के अटोसे

 दिपेन्द्र चौधरी

ओंरीहे जोरी लगाके हेरेबेर

गजल

मोर साहित्यिक सुरुवात के नाउँ हुइस ओंरी ।दिलमे सजाके बना ली यिही अपन गोंरी ।आगे आइ दादु भैया, दिदी बाबु अपनेन के...


रविना चौधरी (रब्बु)

भजनी नगरपालिका, गंजेहुवा

 रविना चौधरी (रब्बु)

अई थारु तुँ कहाँ बाटो

अई थारु तुँ कहाँ बाटोसब्ज आपन हिस्सा अग्वारटजग्गा जग्गाम खुँटा गारटअँग्नक रुख्वक फल झ्वारटतुँ कहाँ बिल्लाइल...


सोम डेमनडौरा

नयाँगाऊँ–८, बर्दिया

सोम डेमनडौरा

“तराईके भूमिपूत्र थारु जति हो ।”

मुक्तक

महाभारतमे भूमिकेलगलडाई हुइल,पाण्डपके जीत हुईल,जनतनमे प्रित हुईलअस्तके थारु यहाँ,बर्षौसे वैथत आइल प्रजाति...


आशाराम चाैधरी,

जाेशीपुर, कैलाली

आशाराम चाैधरी,

डहिटान अंगना सुनसान हाेगैल

मुक्तक

छुनछुन मंजिरक् छन्कारघेल्टुङ्ग घेल्टुङ्ग मन्डरक् टारठुम्मुक ठुम्मुक् पुठ्ठा डुम्कैनाउलर उलर मन्डरा बजैनाउह...


सागर कुश्मी “संगत”

हाल धनगढी कैलाली

सागर कुश्मी “संगत”

कहाँ गैलो टुँ

मुक्तक

कहाँ गैलो टुँ |सुर्र सुर्र बयालके पता पैनु |घुर्र घुर्र नाक बाजतह |ओर्हल गुद्री फेकाके |अपन असली रुप देखाके |मै...


सुमित रत्गैंयाँ

रैकवार बिचवा १ मजगैं कन्चनपुर्

सुमित रत्गैंयाँ

रानाथारू साहित्य जग : एक हरानो चलन

राना थारु संस्कृति

एक दिनकी बात हए,जब मए घरसे निकरो तओ तमान आदमी अच्छे–अच्छे कपडा लगाएक समरके जात देखो । महुँ उनके पच्छु–पच्छु चलपडो...


उजियाराे रानाथारू डटकम कि किताब मैसे

बेलौरी न.पा.–६, भकुन्ड,

उजियाराे रानाथारू डटकम कि किताब मैसे

मोर रिस

बचपन छोर्ति ओजरार मुहारमे जवान हुईनुजस्ते जस्ते बर हुईनु रोंवाँ छुटलपुरान हासल खलल भुलैती रहनुमने केक्रो पर...


असिराम डंगाैरा

हाल सुरत गजरात भारत

असिराम डंगाैरा