इन्डिया डायरी

इन्डिया डायरी

 मुठ लेहाइ: अभिन छोटे रहुँ । मने जानेजुकुर होगैल रहुँ । बुडुक् महा डुलारु रहुँ । छोटेमे बुडुक् संग कबु बन्सी लगाइ टे कबु पहुनी खवाइ हुइल । इ संस्मरणमे इन्डिया घुम्लक् पुरान बातचित आझ लिख्नास लागल ।

 
रौनक् मेला:- चन्दनचौकी लग्गेक हुइलक् मारे मोर बुडु चन्दनचौकी बजार खेले खोप लैजाए । छुट्की फुइक् घर खोनपुरवा गाउँसे पैडर आढा घन्टा लागठ चन्चौकी पुग्ना । कबु रौनक् मेला हेरे जाइ टे कबु जलेबी खवाइ बुडु चन्दनचौकी लजाए । एक फेरा पंचपेंरा बुडुक् सालक् घर पहुनी खाइ गैल रहि । बुडु बुडी ओ मै । टब्बेहें टिलक् मिठाइ खोब खागैल । सरसिकार मास मच्छी टे जुनक् जुन । एकचो पलिया फिलिम हेरे गैली कमल टाकिमे । दिनभर बैठल बैठल जिउ मिच्छागैल रहुँ । ढिंर्ह फुलके हैरान । ऐसा ठुस्की पाड निकरगैल कि सरडारीनके नाक छोप्ना कररा । ओहे बात समझ समझ अभिनसम हाँसी लग्टी रहठ । बुडुक् चोंर्हयाइल रहुँ खरबुज्जा बिलारिक् सिकार टे खोब खाइ मिले । 

दिल्लीक् लोटस टेम्पल घुमाइ:- इन्डियाके राजधानी नयाँ दिल्लीमे घुम्ना हेर्ना ठाँउ मन्से लोटस टेम्पल फे एक हो । इ मन्दिर पुरैना फुला हस (कमलके फुला) जस्का टस बनाइल बा । महा सोहावन बिल्गाइठ । कमल फुलाके आकारमे सिर्जाइल बा इ मन्दिर । सन १९८६ सालमे बनल इ मन्दिरके भिट्टर कौनो फेन भगवानके मुर्टी नै बिल्गाइठ । भिट्टर सराटोल महा भन्डो हल  बा । यहाँ कौनो धर्मके मनैन रोकटोक नैहो । जौन धर्मके मनै जाइ मिलठ । भिट्टर जाके ५ मिनेतसम् ध्यान डेके बैठे परठ । अपन माँगन कैबो टे भगवान पूरा कर्ठै कहिके जनबिस्वास बा । यहाँ जाके ध्यान कैलेसे सारा मनके सिहरा फेन उटरजाइठ । मन हल्लुक लागठ । हुइना टे दिल्लीमे बहुट ठाउँ बा घुम्ना मेरिक । जस्टे कुटुब मिनार, लोटस टेम्पल, पुरान किल्ला, लाल किल्ला, राजघाट, इन्डिया गेट आदि । दिल्ली घुम्ना मौका जुरैले रहिंट साहित्यकार गोचा हिरालाल चौधरी । ओहकान गाडी बिगरके सामान लेहे गैल रहि । 

गोरखपुरके गोरखनाथ मन्दिर:- फागुनके महिना मचल रहे । कपिलवस्तुक् संघरिया श्याम सिटि फोनमे बलाके मिछवइले रहिंट । शिवरात्रीके डोसर बिहन्नी उठ्के धनगढीसे कपिलवस्तु ओर नेंग्डेनु । बिहान ५ बजे नेगल बस ३ बजेओर चार नम्बर जितपुर कपिलवस्तु पुगाइल । ओहाँसे नास्ता खाखुके झोझर डेलि बुटवल । ओहाँसे फे सरासर नाम्डेलि भैरहवा । तालिम बा कहिके बलाबुलुके टे सुनौली नाका छिराके गोरखपुर पुगा डरलैं । साँझ सात बजे गोरखपुर पुग्गैली । बिजनेस सम्बन्धि एक अँठवार तालिम रहे । बिचमे एक दिन अँटवारके बिदा हुइलेक ओर्से  बैठल डेरा ठनसे ८ किलोमिटर डुर गोरखनाथ मन्दिर घुम्ना योजना बनैली । 

गोरखपुरके चर्चित ठाउँ मन्से गोरखनाथ मन्दिर फेन एकठो चर्चित धार्मिक स्थल मानजाइठ् । मन्दिरमे पुजा कैलेसे  सोचल काम पुरा हुइठ कहिके जनविस्वास बावै । आँजर पाँजरके फुलासे सजावट हुइल बा । मन्दिरके डख्खिन ओर लाउमे बैठ्के सयर कर्ना पोखरी फेन गजब मोहन्याइठ पर्यटक लोगन । डस डिनके बैठाइ फेन बहुट उपलब्धी मुलक रहल । ओहे तालिम कुछ कर्ना हिम्मत ओ आँट बर्हल । गोरखपुरसे घरे लौटे बेर गोरखपुर रेलवे स्टेसनसे मैनाली हुइटी पलिया सम डु डिनके रेल यात्रा हुइल । अभिनसमके सबसे लम्मा रेल यात्रा इहे हो । हुइना टे इहिसे पहिले २०५० साल ओर हुइ सायद बेलुवा बर्दियासे बिछियासे चन्दनचौकी ओ चन्दनचौकी से बिछिया रेल यात्रा कैसेक्ले बटुँ । 

अगैक् चट्नीक् स्वाद:- भारतके श्रावस्तिक् थारुनके बारेम जानकार लेहक लाग खोज अनुसन्धान करे २०७६ बैसाख १६ गते मोतीपुर ओ भजकाही गाउँ जैना मौका मिलल रहे । सोम डेमनडौरा गोचक् गोचाली खाजाघर मन्से कलुवा खाके रुपैडियाहे बहराइज ओर लग्नु । बहराइजमे संघरिया कर्मवीर चौधरी साँझके बरा मजासे स्वागत करलैं । डोसरे बिहन्नी उठ्के मोतीपुर सिरसिया ओर लग्नु । वहाँ कलुवा खैना व्यवस्था कर्मवीर फोन कैके जना रख्ले रहिंट । राम करतार चौधरी मास्टर दिन भर अपन गाउँ घुमैनैं । ओहे क्रममे मोतीपुरके सुरेन्द्र चौधरी लगायत संघरियनसे वहाँ  घुम्ना मौका मिलल रहे । 

ओहे साँझके ओहैंक् मिलनसार संघरिया आशिष चौधरीके घर भचकाहीमे डुर्ही डब्ना मौका मिलल । नाउँ किल सुनल रहुँ । जिन्गीमे पहिल बार अगैक् चट्नीक् स्वाद लेहे मिलल् । गोडामिल स्वादके अगै बनुवँम रना एक मेरके फलके रुख्वा हो । इ बैसाख जेठमे मिलठ । भचकाही गाउँमे हरेक साल डेवारीमे थारुनके खेलकुद हुइठ । बलरामपुरमे थारुनके बस्टी बा । भारतमे थारुनके बस्टी रहल ठाउँ जैना इच्छा कहिया जुरठ पटा नैहो ।

सांस्कृतिक कार्यक्रमसे सिकाइ:-जहाँ साहित्य ओहाँ पहिचान । हरेक समुदायके अपन अपन छुट्टे जीवनशैली रहठ । भारतमे फे थारु लोग सांस्कृतिक जागरण कार्यक्रम करठैं । मोतीपुर सिरसिया, चन्दनचौकी लगायत टमान ठाउँमे कार्यक्रम कर्टी आइल बटैं । कार्यक्रममे पहुना ओइनहे  आसन ग्रहण नैकैजाइठ । पहुना लोग अप्नही मन्चमे आके अनुशासित होके बैठल रठैं । कोइ पहुना भासन करल कलेसे ४/५ मिनेट किल बोल्ठैं । बोल्ही टे फे शिक्षासे जोरल बात बट्वैठैं । मने हमार नेपालमे टे नेता लोग एक्के जे एक घन्टासे जेडा बोल्ठैं । आसन ग्रहण नैकरैलेसे झोक्कैना । कार्यक्रममे मजासे नैबैठना । भारतमे कलाके बहुत मान सम्मान हुइठ मने यहाँ टे कुछ नै । अपन काम अप्नही कर्ना बानी, एक्चो कलेसे बात मानजैना, एक डोसरहे सम्मान कर्ना स्वागत शैली गजब लागल । 

लखनऊके बसाइ:- कार्यक्रममे जैबो टे ढेर जहनसे चिन्हजान हुइठ । कोइकोइ संघरियनहे मजा गुन लगैबो टे हरदम सम्झठैं ओ कामफें लगठैं । लखनऊमे फेन आब भारतके टमान ठाउँके थारु बैठल पाजाइठ । मै लखनऊके बसाइमे डा. बलराम चौधरी, मंगल थारु लगायत संघरियन ढेर सहयोग करठैं । एक्चो फोन कैके कलेसे फटाफट बात मानजैना सहयोगी बानी सलाम कर्ही परी । 

ओसिक टे इन्डिया घुमाइ ढेर ठाउँ नैहो । टब फेन यादगार पल जेडा बा । खटीमाके साहित्यकार डा.राज सक्सेनासे फे सैगर उँकवारभेंट हुइल बा । ओहोर पुर्णागिरी दर्शन गैलक् फेन सम्झना मनहे किलकोर डेहठ । 

ओरौनीमे:- घुम्ना किल बरि बात नैरहठ यात्रामे । लावा लावा मनैंनसे चिम्ह्जान लावा लावा ठाँउक् बारेम् ज्ञानगुणके बात फेन ढेर चाज सिखे मिलठ । मनैं अपन छाइ छावन घुमक् रोक लगैठैं । बिग्रक् डरैठैं । मने मै टे कठुँ हम्रे नैघुमके नै जन्ठी । किताबी ज्ञानसे जेडा ज्ञान यात्रा कैके फे सिखे मिलठ । सहि ओ साकारात्मक सोंचलेके नेंगी हरेक परगामे सफलता मिलि ।

धन्यवाद । 

सागर कुस्मी (लेखक धनगढी कैलालीसे प्रकाशित हरचाली साहित्यिक त्रैमासिकके प्रकाशक ओ प्रधान सम्पादक हुइँट् ।)

सागर कुस्मी

सागर कुस्मी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

हे भगवान ओइनहे ना परच्वाएउ

पहिले टे सिरिजल, जलथल ढरटी ।सिरिजीटे गइलाहो कुसकही डाभ ।।हुइनाटे मै गल्ती फेन हो सेक्ठुँ । लकिन मही महा अचम्भ लागठ कि यी पृथ्वीके उत्पत्तीके पुरा इतिहास


भाष्कर देव चौधरी

समानता, शिक्षा ओ रोटी

मनै मुअक टे जर्मलक नै हो, बेन जियक टे जर्मलक हो । प्याट केल पालक टे जिना टे संकिर्ण वा घिनलक्टीक विचार हो । अ‍ैसिन घिन लक्टीक विचारह ठाउँ देलसे मनै उन्नतिम


शत्रुधन गोचाली

अपन लइकन सु–संस्कारवान बनाएक जरुरी

समयके गति अपन धुरीमे बहुट तेजीसे आगे बढतबा । एके केउनाई रोक पाई समयके गतिके साथ साथे हर एक चीजमे बहट तेजीसे परिवर्तन हो रहलबा । पहिलेक समय आउर अबके समयमे बहुट


श्याम सिटी