ओंरीहे जोरी लगाके हेरेबेर

मोर साहित्यिक सुरुवात के नाउँ हुइस ओंरी ।
दिलमे सजाके बना ली यिही अपन गोंरी ।
आगे आइ दादु भैया, दिदी बाबु अपनेन के सबजे
अस्रा मे बा अपनेन के लेडी ना यी रब्बु के ओंरी । 
(गजल–१)

बिहान उठट मोर माथेक मँगिया, पुकारटा टुहिन ।
फुन्ना लागल मोर झोंतिक सगिया, पुकारटा टुहिन ।
चमचम चम्कठ् घेंचक कन्सेहरी, ओ कानेक टर्की,
कचौटि काटल मोर देहेंक, अंगिया पुकारटा टुहिन ।
(गजल–२)

टाइट पाइन्टसे ते हमार लगैना, लेहंगा फरिया मजा ।
पुरान जमानक ठुनियार देखैना, गहना तंरिया मजा ।
औरे फुलाम काहे दर्ना मलजल, दौनाबेबरी रति–रति ।
सुखैलेसे फेन मीठबास देहना, उहे फुलक् डँरिया मजा ।(गजल-३)

कहिया बनैबो छैला, हमार सुतना चाकल खटिया ।
नै कतठ टोहाँर बिना, करोट लेहति नम्मा रटिया ।
कतना सुहावन रहि उह रात, जब मै टोहाँर कोनम रहम ।
रातिक् जोनह्या, तोरैयाँ फे चम्कहिं सुनके मीठ बटिया ।
(गजल–४)

इ देशेक नेता हुक्रन का हुगैलिन, आब हेराई चलि गुरै पाती ।
अइना संविधानमे आपन पहिचानके, सुन्गाई चलि दिया बाती ।
बहुत सहसेक्लि, आब नै सहे सेकब एकलौटी शासन हम्रे सबजे,
आब उठी जुरमुराई यँहाक भूमिपुत्र, सक्कु आदिबासी जनजाति ।
(गजल–५)

अपन डाडा भैयन्से कबु घर फुट्न बात नै कर्बी । 
औरेक् जाँगरसे कमाइल सम्पत्ति लुट्ना बात नै कर्बी ।
बचाई पर्ना बा हम्रहिन अपन पहिचान ओ अस्तित्व,
कन्ढामे कन्ढा मिलाई आपसमे छुट्ना बात नै कर्बी ।
(गजल-६)

रविना चौधरी (रब्बु)

भजनी नगरपालिका, गंजेहुवा

 रविना चौधरी (रब्बु)

जनाअवजको टिप्पणीहरू

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- सुबास चौधरी

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