गजल

गजल

गजल
आगी ठिट्कोर्बो बरठ नाइ ।
बात ट उठ्गर्बो गुठगरठ नाइ ।

जब जब चिमोठक खोज्बो ट,
छलफल म निचोड निकरठ नाइ ।

संस्कार संस्कृतिके बाट बट्वाकेफें,
अधिकारके बात आघे सरठ नाइ ।

बुझाइ ट खोज्बो, मने कोइ नैबुझठ,
नाच ट नच्ठी मन्द्रामे उलरठ नाइ ।

जब जाइठ भुइँचाल बन्के सिंहासनमे,
टब थारुनके काम कोइ करठ नाइ ।
वीरबहादुर राजवंशी
कंचनपुर

वीरबहादुर राजवंशी

वीरबहादुर राजवंशी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

गजल

पट्ठरहे खुशी पारक लाग फुला चह्राइक् परठ ।ना बोलठ् ना चलठ टबफें शिर झुकाइक् परठ । स्वार्थी समाज स्वार्थी संसार अस्टही बा यहाँ,केकरो चोटमे अपन मन काहे रुवाइक्


वसन्त चौधरी

सुर्खेत ओ दाङके सम्झना

संस्मरण कृष्णपुर गुलरिया कंचनपुरसे थारुनके धरोहर जोगराज चौधरीके नेतृत्वमे वडा नम्बर ३,५,६ केअध्यक्ष क्रमश सुन्दर चौधरी, आशुराम चौधरी, नत्थुराम चौधरी ओ


वीरबदाहुर राजवंशी


वसन्त चौधरी