गजल

गजल

गजल

मोर बोली बचन टुहिन भास लागठ कलेसे ।
मै दुर हुइटुँ टोहाँर मनमे ठेस जागठ कलेसे ।

खै कसिक गजलकार होगैल रहुँ चार दिनके,
मै फेन मंजुर बटुँ टोहाँर मन भागठ कलेसे ।

टुँ महान बटो, टोहाँर सत्ता, बिचार महान बा,
मोर डेंह मोर बिचार टुहिनहे ठागठ कलेसे ।

नैलिख्ना रहे महि ना टे कुछ सोंचना रहे महि,
मोर करल काम टोहाँर सिमा नाघठ कलेसे ।

टुहिन राजधानीसम् पुगुइया महि हुइटुँ हजुर,
आप का पट्यैबो टुहिन मोर बानी काटठ कलेसे ।

सागर कुस्मी
कैलाली

सागर कुस्मी

सागर कुस्मी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

गजल

पट्ठरहे खुशी पारक लाग फुला चह्राइक् परठ ।ना बोलठ् ना चलठ टबफें शिर झुकाइक् परठ । स्वार्थी समाज स्वार्थी संसार अस्टही बा यहाँ,केकरो चोटमे अपन मन काहे रुवाइक्


वसन्त चौधरी

सुर्खेत ओ दाङके सम्झना

संस्मरण कृष्णपुर गुलरिया कंचनपुरसे थारुनके धरोहर जोगराज चौधरीके नेतृत्वमे वडा नम्बर ३,५,६ केअध्यक्ष क्रमश सुन्दर चौधरी, आशुराम चौधरी, नत्थुराम चौधरी ओ


वीरबदाहुर राजवंशी


वसन्त चौधरी