गजल

गजल

गजल
समाजमे एक्ठो डिया बारके जाइटुँ ।
ओजरार डि कहिके ढारके जाइटुँ ।

अन्ढार ठाँउहे ओजरार कराके आझ,
कब्बु नै बुट्ना केरनि सारके जाइटुँ ।

बुद्धके सत्य सत्य ज्ञान जोरके यहाँ,
शान्तीके एक्ठो खम्भा गारके जाइटुँ ।

एकताके माला घलाके सक्कु जहन,
आब सदभावके पोक्री पारके जाइटुँ ।

बिचारके एक परगा आघे बर्हाके यहाँ,
अन्धविश्वासहे कलमसे फारके जाइटुँ ।
साफी चौधरी
कंचनपुर

साफी चौधरी

साफी चौधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

गजल

पट्ठरहे खुशी पारक लाग फुला चह्राइक् परठ ।ना बोलठ् ना चलठ टबफें शिर झुकाइक् परठ । स्वार्थी समाज स्वार्थी संसार अस्टही बा यहाँ,केकरो चोटमे अपन मन काहे रुवाइक्


वसन्त चौधरी

सुर्खेत ओ दाङके सम्झना

संस्मरण कृष्णपुर गुलरिया कंचनपुरसे थारुनके धरोहर जोगराज चौधरीके नेतृत्वमे वडा नम्बर ३,५,६ केअध्यक्ष क्रमश सुन्दर चौधरी, आशुराम चौधरी, नत्थुराम चौधरी ओ


वीरबदाहुर राजवंशी


वसन्त चौधरी