गजल

गजल

तुलाराम सनम
जानकी–५, कैलाली
९८१२६९३५००

गजल
सुनो मै जवाफ देहतु, सवालके बाते ना करो
समाधान तो हु सेकल बबालके बाते ना करो ।।

अनिष्ठ , खडेरी, संकटकाल, लुटपाट हु सेकल
लागठ छुटीछुटी हो बिकरालके बाते ना करो ।।

देखुईया उप्परवाला सब कर्तुत देख्ती बाटै
हत्या, हिंसा, रक्तपात आहालके बाते ना करो ।।

दिन आईठको राजामहाराजा, धनीधनी मनै फे मुठै
घट्ना हो, कोट पर्व, भण्डारखालके बाते ना करो ।।

जन्मल पाछे मुयेक पर्ना संसारके जो रिती हो
कोई आगे कोई पाछे कछुवा चालके बाते ना करो ।।

तुलाराम सनम

तुलाराम सनम

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

‘डुटिया’ ह्यारबेर

जब मनै इ ढरटिम पहिला पैला ट्याकट टबसे वाकर जिनगि जिना संघर्स सुरु हुइट । आपन जिनगि जियक लाग संघर्स कर भिरठ् । संघर्स कर्ना क्रम म समय ओ परिस्ठिटि लेख वाकर


पुनाराम कर्याबरिक्का

गजल

का कमि रहे हेर्ना उ नजर भुलाडेलो ।साँझके सिटरैना उ नहर भुलाडेलो । दुई मुटुके मिलन हुइना गुरही चोकमे,मोर घरे ओर अइना उ डगर भुलाडेलो । टँु मोर मैया प्रेमके बहियाँमे


विश्वदेव चौधरी

गजल

जहर डंगौराजान पहिचान, मनैनके जवानी हो ।जिन्गी सँचमे, समुन्डरके पानी हो । मन लग्ना पिना, करठै बहाना मनो,टेन्सनमे खैना पिना, केकरो बानी हो । छोरना बा सब, आइ जब


जहर डंगौरा