गाेंरी बिन्ना तरिका

गाेंरी बिन्ना तरिका

गाेंरी बिन्ना तरिका
गंोंरी पश्चिम नेपालके थारु समुदायमे विशेष कैके बिन्ठैं । गाेंरी बिन्ना थारु समुदायके रीतिरिवाज संस्कार ओ चालचलन फेन हो । गाेंरी बिन्ना चलन पुर्खासे चल्टी आइल बा । जौन अभिन फेन गाेंरी बिन्टी बटैं । थारु जातिनके पहिचानसे जोर गैलक कसुंगा पुंजासे बनाजैना ढकिया, डेलुवा, पैनस्टोपी, पन्छोपनी, ढक्ली आदि हो । जब थारु समुदायके मनै खेट्वा लगाके सेक्ठैं टे खाली रहल बेला गाेंरी बिन्ना काम सुरु कठैं ।

थारु जातिनके कौनोफें पुजा आँटी, शुभकार्य, दान, पहुरा डेहक् लाग ओ मनै औरे बेलाके लाग फेन गोंरी अनिवार्य प्रयोग कैजाइठ । कसुंगा पुंजाले बनाजैना जत्राफेन सामान ढकिया, डेलुवा, पनछोपनी, ढक्ली, भौका, पैनस्टोपी यी सक्कु बनाजैना थारु मनैनके सभ्याताके प्राकृतिक सुरुवात हुइलक पाजाइठ । यी थारु जातिनके सभ्याता ओ संस्कृतिसे जुरल बा । थारु जातिनके किल नै अझकल गैरथारु जातिनके मेरमेरीक कार्यक्रममे फेन पहुना हुँकनहे स्वागत करेक लाग ढकिया, डेलुवामे फुला ढैके स्वागत कैजाइठ । थारु जात ओ गैरथारुनके कौनो फेन कार्यक्रममे थारु जन्नी मनै कपारीमे कसुंगा ओ पुंजाले बनागैलक डेलुवा, ढकिया लेके आघे पहुना हुँकनके स्वागत करठैं ।

थारु समुदायके एकर इतिहास प्राकृतिक अवस्थामे मानव सभ्यातामे आघे बह्राइक् लाग थारु हुँकरे अपन दैनिक आवश्यकता पूरा करेक लाग ओ जैसिन चिजके आवश्कता पर्लिन ओ प्रविधिके सिर्जना अपनहे करलैं । कौनो फेन सामानके विकास घाँस, पटिया जैसिन वनस्पतिसे थारु हुँकरे अपन कला प्रयोग कैके असिन चिज सृजना करलैं । ओहे कला सीप थारु हुँकरे अपनहे सिरजाइल हुइटैं । पहुरा डेहेक लाग, ढकिया डेलुवा, नन्डिया हुँकनके लाग खेलौना बनैना ओ लुगा ढर्ना भौका, ढिकरी उस्नक लाग पैन असिन चिजके सिर्जना उत्पादन हुइल मनैनके एकठो सभ्याता हो ।

थारु जातिनके जन्मसे हेके ओराइल बेलासम चहना चिज गोंरी हो । यी थारु जन्नी मनै अपनहे सिर्जना करलैं । कौन मेरके आकार डर्ना, कसिन करैना, सादा करैना कि रंगिन करैना, कत्रा भारी बनैना, कत्रा छोटी बनैना, कौन काममे बेल्सना यी सक्कु चिज थारु जन्नी मनै अपनहे सिर्जना करठैं । पुजा आँटीमे रंगिन गोरी नैबेल्सठैं । काहे कि पुजा आँटी चोखा काम ओ पवित्र काम हो । प्राकृतिक चिजके प्रयोग करलेसे पुजा आँटी चोखा मानजाइठ । रंगिन गाेंरीमे रासायनिक केमिकल प्रयोग हुइल ओरसे पुजा आँटीमे रंगिन गोंरी नैबेलस जाइठ । रंगिन गोंरी भोजमे बेल्सना करल बटैं । अपन चेली बेटिनहे डाइजोके रुपमे फेन डेना चलन बा । गोंरी डाइजो डेना चलन चल्टीमे अभिन फेन बा ।

थारु जातिनके जन्मसे लेके ओराइलसम बेल्सना गाेंरी अझकल हेरैटी जाइटा । गाेंरी हेरैटी जैना दोष अझकलके पुस्टा हुँकनके हो । अझकलके पुस्टा हुँकरे गोंरी बिन्नाहे ढेर महत्व नैडेहेल ओरसे यी गोंरी हेरैटी जाइटा । भौकाके ठाउँके डराज, पैनस्टोपीके ठाउँमे मम खैना भाँरा, ढकिया डेलुवाके ठाउँमे प्लाष्टिकके भाँरा अइलक ओरसे थारुनके चलन चल्टीमे आइल कसुंगा ओ पुंजासे बन्ना भाँरा हेरैटी गिल बा । ओस्टके थारु जातिनके जन्नी मनै बनैना गाेंरी लोप हुइटी रहल ओरसे उही संरक्षण करेक लाग गोंरी बिन्ना तालिम आयोजना डेना फेन बहुट जरुरी बा ।
रविता चौधरी

रविता चौधरी

रविता चौधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

भाषिक मृत्युसंगे पहिचानके सवाल

भाषिक मृत्युसंगे पहिचानके सवालएक जाने कले रहैं, महिन हेरके कोइ मै थारु हो कहे सेकी ? मोर पहिरन हेरलेसे आधुनिक समय अन्सारके कोट पाइन्ट लगैठु । आब अप्नही कहि


उर्मिला गम्वा थारु

मुक्त कमैया थारु, परम्परागत पेशा ओ प्रभाव

मुक्त कमैया थारु, परम्परागत पेशा ओ प्रभावकमैया प्रथा पश्चिम नेपालके दाङ से कंचनपुर सम फैलल डास प्रथा जस्टे हो । कमैया विशेष कैके घरके काम ओ खेतीपाती कामके


अन्जेल कुश्मी

थारु बोली जट्टिक उसिट लागठ, का ?

थारु बोली जट्टिक उसिट लागठ, का ?जबजब आँग ढिकठ, जिभ स्वाद नैपाइ लागठ, टब लिरौसीसे अन्सार लगाइ सेक्जाइठ कि जिउ चुम्मर नैहो, जीउक भिट्रि पुर्जम कुछ ना कुछ गरबर


शेखर दहित