तलास

तलास

कविता
तलास

अधियारि रातमें बस एक जुगनी की तलास में
जा उजडो गाउँसे बस एक जिन्दगीके तलास में
मनभर हजार सपना और हजारौँ कोस दुर
भरी हय उडान खुला आसमानमें
बस एक जिन्दगीके तलासमें

हजार सवालसे सवाल उठरहो
मन भओ आनन्द बस एक जवाफमें
का खुब हय,
मुरकके सामने मुरख बने
घायल भए बस एक प्रहारमें
हम तुम पढे सिर्फ सिद्धान्त
सिख मिलो अनुभव बिराट हय
बस जिन्दगीके खुला किताबमें
भरी हय उडान खुला आसमानमें
बस एक जिन्दगीके तलासमें

घर बहे जो माबाप संग रहय
साथी बहे जो हर दुख संग निभाय
हीरामोतीसे तौल भारी बो मुस्कान हय
सब धन छोडके निकर पडे राहमें
एक बार घुमके त देख अपने गाउँमें
दिन कटरहे बस तुमर इन्तजारमें
हर झोली खुसीसे भरजाय
अगर तुम ठानलय जो ख्वाबमें,
फिर बसन्त बहार आय रेगिस्तानमें
बस तुम चल पडे एक राहमें
कबसे नयेँ जिन्दगीके तलासमें

मनभर हजार सपना और हजारौँ कोस दुर
भरी हय उडान खुला आसमानमें
बस एक जिन्दगीके तलासमें


लक्ष्मी राना
कैलारी-९ गदरि
या

लक्ष्मी राना

लक्ष्मी राना

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

गजल

पट्ठरहे खुशी पारक लाग फुला चह्राइक् परठ ।ना बोलठ् ना चलठ टबफें शिर झुकाइक् परठ । स्वार्थी समाज स्वार्थी संसार अस्टही बा यहाँ,केकरो चोटमे अपन मन काहे रुवाइक्


वसन्त चौधरी

सुर्खेत ओ दाङके सम्झना

संस्मरण कृष्णपुर गुलरिया कंचनपुरसे थारुनके धरोहर जोगराज चौधरीके नेतृत्वमे वडा नम्बर ३,५,६ केअध्यक्ष क्रमश सुन्दर चौधरी, आशुराम चौधरी, नत्थुराम चौधरी ओ


वीरबदाहुर राजवंशी


वसन्त चौधरी