दो नम्बरी भरभट्टामे एक दिन

दो नम्बरी भरभट्टामे एक दिन

हुईना टे शहर बजार ओर दो नम्बरी गाडी नाई चल्लेसे फेन गाउँघर ओर अभिनसम लुकछुपके यि मेरिक गाडी चलल् देखजाईठ् । अकसर कैके यी मेरिक भरभट्टा गाउँघर ओर बहुट कुदट् देखमिलठ् । अनटेष्ट, सेकेण्ड हेण्ड, थ्री हेण्ड, फोर्थ हेण्ड लगायत दशौं हेण्डसमके यी मेरिक गाडी गाउँघरमे घुईयक भाउँमे किने सेकजाईठ कना सुनमिलठ् । चाहे जत्रा धेउर या कम दाममे मिले मोर का मतलब ।

काम विशेष लेके यिहे अगहन ४ गते विफेक रोज गदरियाके श्री जनता उच्च माध्यमिक विद्यालयमे जैना तय हुईलस् । एक दुई दिन आघेसे पहुरा थारु दैनिक मसुरिया क्षेत्रके व्यूरो चिफ दिनेश दहित कान खैले रहिट । गोत्र कहिया आईटी ? फोन उठैटी किल यिहे शब्द सुन मिले ।

काबु काल गारी फेन मिले । सा¥यो टुहरे पहुराके स्टाप अस्ते होउ । बलाईल पर मोर गाउँघर ओर कबु नाई अइथो । हुईना टे दिनेश जी कबु प्रेम सर हे टे कबु लखन सर टे कबु महिन फोन कैके बलैटी रहिट ।

ओहकान प्लान का रहे कलेसे हम्रहीन वहाँ मसुरिया, उदासीपुर क्षेत्रके ग्राहक, विज्ञापनदाता लगायत पहुराके शुभचिन्तकहुक्रनसे चिन्हापर्ची करैनाके साथे रिपोर्टिङ फेन करलेना । मने हमार अफिस ओर टाईम नाई मिलाई सेकके उहाँ देली सक्कुहुन पालिक पाला फोन कैने आपन फिल्ड ओर बलैने करिट ।

बलटिउँके टाईम मिलाके दिनेश जीहे मै ४ गते बिहन्नी मसुरिया पुगटुँ कहिके जनैनु । उहाँ बहुट खुशी होगैलाँ । लि गोतियार अप्नेन्हे मोर एरियाओर हार्दिक स्वागत बा, काल्ह जल्दी अईबी । रातके पौने ८ बजल रहल हुई । मै कानमे आपन मोवाईलके कानफोन लगाके बीबीसी सुनट रहुँ ।

मोवाईलके घण्टी बोलल् । हेरनु, दिेनेश गोत्रके फोन आईट देख्नु । फोन उठैटी किल गोत्र जी काल्ह कत्रा जुन आईटी ? ओ कैसिक, केम्ना आईटी ? गोत्र जी काल्हीक प्लानके सब मै इन्तजाम मिलासेक्ले बाटुँ । अपने काल्ह सक्करही बसमे मसुरिया पुगी । यहाँ पुग्बीटे देखाजाएगा ।

सक्कारे हुईल । आजकल थोरिक जार बढसेकल बा । महिन भिन्सरही उठनास मन नाई लागल । मै सोच्नु ८ बजेओर गैलेसे फेन टे आपन सक्कु काम भ्याई सेकजाई । उहे मुताबिक आपन धनगढीसे जैना प्लान बनाके उठ्नु खाना पकाई । खाना पुकुके लहाखोरके खैनु पिनु अफिस ओर लग्नु ।

अफिस पुग्नु लगभग साढे ८ बजसेकल रहे । आठ बजेओर मसुरिया पुगे परना मनैयक ढिला टे ओस्ते होसेकल रहे । अईसेबेर १५÷२० मिनेटके फरकमे छुट्ना गारी उ दिन कने कैसिके एक घण्टासे धेउर बसपार्कमे रुकल हुईबु बसे नाई जाये । बलटिउँके एकथो कबारी गारी धुँवा निकरटी पेंपें–पेंपे बजैटी आईल ।

कबारी गारी ओमहे खलसिया फेन कबारी । खलसिया हे मै यि मानेमे कबारी कलुँ कि ओकर यात्रुहुक्रनसे बोल्ना टमिज नाई रहिस् । बहुट गन्दा–गन्दा भाषा बोले । हुईना टे सायद सक्कु गारीके खलसिया ओहे टाईपके रहठुईही । काहे की ओईने सत्तर घाटके पानी जो पिले रठै । अन्यथा ना लागे यी खलासीनमे लागूहुईना मेरके किल कहल हो ।

उ दिन टाईममे बस जैबे नाई करे । उहे थोत्रे बसमे जैना हुईल । आजकल नेपालमे हरके दिनहस सक्करी सडक दुर्घटनामे अत्रओत्रा जने ज्यान गुमैनै कहिके सुनमिलठ् । तमान पत्रपत्रिका रेडु, टिभीमे देली अस्ते न्यूज पढे, सुने, देखे मिलठ् । यी दुर्घट्ना हुईल कारण सबकोई अपने तर्क वितर्क देथै ।

कोई डैबरुवाके गल्ती हो कहठ् टे कोई सडक केहो । कोई बसके हो टे कोई बस मालिक के । कोई ट्राफिक प्रहरीन्के गल्ती देखठ टे कोई बससमितिके । यी फेन रेडियो, टिभी, पत्रपत्रिकामे देखे, सुने, पढे मिलठ् । यात्रुनके भर कोई नाई गल्ती देखठ् । यात्रुनके फेन बहुट गल्ती रहठ् ।

बसमे सिट प्याक बा कलेसे औरे बसमे जैना नाई हो ओहे बसमे जैना बा । हुईना टे यात्रुनके फेन आपन बाध्यता परिस्थिती रहठ् । कौनो ठाउँमे समयमे पुगे परना । तौन फेन थोरचे सोच बिचार कैके यात्रु फेन यात्रा करेबेर ध्यान देलेसे सायद कुछ हदसम हुईलेसे दुर्घट्नाहे न्यूनीकरण करे सेकजाईट कि ?

सरकारके फेन यम्ने बहुट गल्ती ओ कमीकमजोरी बाटिस् । काहे कि सरकारसे कबुनाई चेकजाँच करठ् कि सडकमे कौन मेरके गारी चलटा ओ नाई चलथो । कैसिन गाडीहे रोडमे चले देना ओ कैसिन गाडीहे चले नाई देना । गारी रुटपरमिट लेले बा कि ओस्टे चलटा ? आखिर बस चलटा टे यात्रुसे ओभर लोड कैके चलटा कि ? डैबरुवा अनुभवी बा कि नाई हो ।

ओकरथन डाइबर लाईसेन्स बाटिस कि नाई हुईस् । यी सक्कु ओर ध्यान देना सक्कुहुनके जरुरी बा । नेपालके भौगोलिक स्थितिके बारेम टे सक्कुहुन मालूमे बा । थोत्रे बस ओ अनभव नाई रहल डाईबर चलैही टे दुर्घटना टु हुईना सेवर बा । यी सब कमीकजोरीके कारण नेपालमे दिनप्रति दिन दुर्घट्ना हुईना बढल हो ।

यी सब लिखटी बेला एकथो बात याद आईल । आसौंक साल देवारी माने गाउँ जाईट रहुँ । र्कािर्तक ६ गते दियादेवारी(लक्ष्मी पूजा) रहे । ओहे दिन मै ३ बजेक बस क्याम्पस रोड रहल बसपार्कसे पकरके जाईट रहुँ । टरटिहुवारके समय । बसवालाहे टे खाली पैसा लुट्ना बा । चाहे जैसिन गाडी रहे । ओभर लोड कैके छेग्रीभेडी लादेहस यात्रा करैना बरा सिपार रठै ।

बसमे ठाउँ नाईहो कहटी–कहटी पाईलसम सक्कुहुन चढा लेथै । हुईना टे सबके घरे जैना रहठ् । टाईममे पुगही परना रहठ् । उ दिन मोरफेन समय मे पुगजैम कहटी ३ बजेक छुट्ना बसमे बैठ्गैनु । उ दिन अत्रा भिड रहे कि का बताउँ । अत्रा धेउर मनै लोड करलेबा बस वाला मने ओकर बस अत्रा कबारी कि नोन्से बदल्लेसे फेन नाई बदलेवाला । मोर घर डेढ घण्टा पुग्नामे उ दिन ५ घण्टा लगाईल । कबारा टे कबारा । ठाउँ ठाउँमे चक्काके नट खुलजाईस ।

ना बिजली न टे हरन ना टे ओकर मजासे ब्रेक काम करीस । गारी फेन धक्का पेंक वाला । जाइट–जाईट अन्धार होगैल । आब बसमे आगेक बिजली नाई हुईस खलसिया टर्च देखाए टे डैबरुवा बस चलाये । उ दिन अत्रा कबारी गारीमे यात्रा करनुँ कि जिन्गीम नाई करले रहुँ ।

हुईना टे सक्कु मेरके चीजमे अनुभव लेहे परठ् । आब यम्ने कही केकर गल्टी होवई ? यी मेरके कबारा गारी गाउँघरमे अईना रोक लगाईक लाग गाउँओरीक मनै फेन थोरचे चलाख हुईना हो कि ?

क्याम्पस रोड, फुलवारी, हसुलिया हुईटी रामपुरके रुटमे चल्ना गारीके मालिक, डैबरुवा, खलासी टे आउर चलाख रठै । धनगढीसे जाईबेर अत्राधेउर यात्रु लोड करले रथै कि जे यात्रा करठ् ओहे जन्ले रहठ् । क्याम्पसरोडसे कनरीके प्रहरी चौकी पुग्नासे पहिले यात्रुहे बस भित्तर थुसुवा पैले रठै ओम्हे बसके छटमे

– राम दहित

– राम दहित

– राम दहित

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

‘डुटिया’ ह्यारबेर

जब मनै इ ढरटिम पहिला पैला ट्याकट टबसे वाकर जिनगि जिना संघर्स सुरु हुइट । आपन जिनगि जियक लाग संघर्स कर भिरठ् । संघर्स कर्ना क्रम म समय ओ परिस्ठिटि लेख वाकर


पुनाराम कर्याबरिक्का

गजल

का कमि रहे हेर्ना उ नजर भुलाडेलो ।साँझके सिटरैना उ नहर भुलाडेलो । दुई मुटुके मिलन हुइना गुरही चोकमे,मोर घरे ओर अइना उ डगर भुलाडेलो । टँु मोर मैया प्रेमके बहियाँमे


विश्वदेव चौधरी

गजल

जहर डंगौराजान पहिचान, मनैनके जवानी हो ।जिन्गी सँचमे, समुन्डरके पानी हो । मन लग्ना पिना, करठै बहाना मनो,टेन्सनमे खैना पिना, केकरो बानी हो । छोरना बा सब, आइ जब


जहर डंगौरा