बतासे झरनाके सम्झना

बतासे झरनाके सम्झना

डसिया अइनासे पहिले कंचनपुरके बेलडाँरि ओ बतासे झरना घुमे जैना योजना बनल रहे । मने डसिया लग्गे आइगिल कहिके वहाँ जैना नाइ हुइल ।मने डसिया औरैती किल वहाँ जैना फेनसे सल्लाह हुइल । हम्रे हमार गाउँ दुर्गौलीसे निकर्ली । यहाँसे हम्रे मोटरसाइकलमे दुई जाने गैली । सक्कु जाने अतरिया जुतके वहाँसे सिधा कंचनपुरके झन्डाबोझी गाउँक बरघर हिमाली चौधरी घर गैली । पुगके सक्कु जहन राम राम करली ।

वहाँ टो पुग्ती किल बैठेक तन खटिया बिछैनै और पानी देहे लग्नै । “कठै खैना पिना टो अस्ते तस्ते हो, कहु जैबो टो मजासे बोली बचन कर्ना और बैठे देना और एक लोटा पानी देहै उहे सब्से बर्वार बात हो ।“
एकघरीमे टो पचपचसे साँझ होगिल । कार्तिकके महिना ना कहे जाए । बतासे झरना बहुत दुर हुइलेक और्से उहे दिन वहाँ जाके लौतके आइ सेक्ना अबस्था नाइ हुइल बस नाइ गिलि । तब जाके सल्लाह कर्के अब कंचनपुर बेलडाँरि थारु संग्राहलय जाइ कना बात हुइल ।

सक्कु जे ढिला नाइ कर्के संग्राहलय अवलोकन करे जाइ कना सल्लाह हुइल और निकरगिलि हम्रे सक्कु जाने । वहाँ बर्वार बर्वार मनै हमार अस्रा लाग्ल रहिंट । उहे संग्राहलयके अध्यक्ष सब हमार थारु जात हिन चिहिनैना गर गहना, पुरान पुर्खौली गोरा मन घल्ना पौवा से लैके सक्कु समान बहुत मजासे ढारल बा । बहुत खुशीक बात रहे मोर लग टो । जोकि पुरान पुर्खौलि सरसमान देखे मिलल । बुझे मिलल । कुछ सिखे मिलल । हम्रे सक्कु मजासे अवलोकन कर्के आब अन्धारफे हुइता कहिके घर लङ्ग जाइ । बरघर जि क घरमे भात टिना पकाता उहै मजासे खाब नाच गान कर्ब कैक घरे और लग्ली । अन्धार हो चुकल रहे सुट्ना ठाउमे मने पुग्ली ।

वहाँ एकघरी बैठके सेकके आब भात खाइ चलो कैके कहे लगनै बरघर । सक्कुजे सङ्गे लाइन लागके बैठ्लि और भात खैली । एक घची पाछे बरघर गाउँ मनिक मनैन बलाके नाच गान करि कैक खुब जोर जोर्से मन्द्रा बजाइ लग्नै । और गित फे गाई लग्नै । वहाँक् मनै बरे सिपार सिपार रना । बरघर सब जहन पुरान पुरान गितके तालिमफे देहल रहै । उहे गाके सुनैनै बहुत मजा लागे महिन टो । झन झन रात उहे झन झन मजा लागे सागर दाजु एक छिन टो खुब नच्नै । आहा हेर्ती मजा लग्ना । धिरे धिरे बहुत रात हुइ लागल अब सुति कैक सुत्ना कोन्तिम गैली और सुट्लि । काहे कि दोसर बिहान टो हम्रहन बतासे झरना हाली जिना रहे बस हाली सुत्गिली ।

दोसर बिहान हम्रे सक्कु जाने हात मु धोके नास्ता पानी कर्के बिहानी चल गिलि बतासे झरना अवलोकन करे । बतासे झरना बहुत दुर हुलेक और्से दग्रे मन चाउचाउ भुजा लेलि । और निकरपर्ली पाहारे पाहार बतासे झरना ओर । हस्ती बत्वैती अप्न लेखल मुक्तक गजल सुनैती संघरियन संग हुक्रहन नेग्ती कर्ली । कहु जैबो टो नेग्बो टो शरीरफे मजा रहठ । नेगे पर्ठ कना अस्ते अस्ते बात हुएती रहे । सक्कु जाने कब आइ बतासे झरना हम्रे टो नेग्के मिछाइ गैली कना हस बात करै । सगार दाजु जुन सक्कु हुनसे लास्त रना । भाइ रुकि बिसाली कहै । हम्रे जुन नेग्नै करि । काहे कि हाली पुग्ना रहे । और हाली घुम्के फे आइना रहे । मने दुई घन्टाके नेगाइ पाछे बलतल पुग्ली टो सब चिलाइ लगनै । वाह कहिके कोइ कहटा हा जब पुग्ली टो बहुत मजा लागल । सक्कुजे एक छिन बिसाइ लग्नै । और फोटो औटो खिछे लग्नै ।बहुत रमणीय ठाउँ लागल महिन टो सब्से सुरुमे हम्रे पुगल रहि उ ठाउँ एक छिन पर्से टो मनै बहुत आइ लगनै । उहाँ हम्रे ढिला नाइ कर्के यादके लग ग्रुप मन फोटो खिच्ली । और लैगिल नास्ता उहै खैली । और नेग्नै कर्ली वहाँसे । वहाँसे आइना क्रममे मनै टो लाइन लागल जाइ लग्नै । एक दुई ठो नाइ १००÷२०० मनै गैनै हमार आइठ भरिम ।

दग्रेमे तब उहाँसे ढिला नाइ कर्के सिधा घरे आइलि । और भात तिना सब पाके तयार रहे । उहे खैली और घरे लङ्ग नेग्नै कर्ली काहे कि मोटर्साइकलके सफर रहे घरे पुग्थ पुग्थ हमार सात बज्गिल रहे । घरे पुग्के बिरि खाके थकलके मारे मै टो सुट्गिनु । धन्यवाद ।

तिलक डंगौरा

तिलक डंगौरा

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

गजल

पट्ठरहे खुशी पारक लाग फुला चह्राइक् परठ ।ना बोलठ् ना चलठ टबफें शिर झुकाइक् परठ । स्वार्थी समाज स्वार्थी संसार अस्टही बा यहाँ,केकरो चोटमे अपन मन काहे रुवाइक्


वसन्त चौधरी

सुर्खेत ओ दाङके सम्झना

संस्मरण कृष्णपुर गुलरिया कंचनपुरसे थारुनके धरोहर जोगराज चौधरीके नेतृत्वमे वडा नम्बर ३,५,६ केअध्यक्ष क्रमश सुन्दर चौधरी, आशुराम चौधरी, नत्थुराम चौधरी ओ


वीरबदाहुर राजवंशी


वसन्त चौधरी