मन बल्गर बनाके जिई

मन बल्गर बनाके जिई

कविता

हाँ हम्रे सुन्लि
चिन, भारत, अमेरिका
औरऔर देशके खबर
डेख्ली रुइलक, शोक परलक्
हप्तौं दिन लास लेके बैठल
हाँ आब ओस्ट अवस्था हम्रे भोगटी बटि
हेर्ली हजारौं मनैन पिडा म छ्ट्पटाइट्
यहाँ महामारीफे चल्टी बा
राजननीतिक कुर्सी तानातान
नेता नेता बिचके झगडा मनपर्दी फैसला
अस्पतालके उच्च शुल्क
ब्यापारिनके मन पर्दी व्यापार
उ फे
हम्र सटर्क हुइ पर्ना जरुरी बा
जिन्करी लापरबाही
छोरडी जिद्दी बानी
अपनाइ सावधानी
जिट्ना बा मृत्युहे
जिट्ना बा समयहे
बच्ना बा आपन सामर्थ्यले
रमैना बा सक्कुजे संगे मिल्के
आउ गोचाली
मन बल्गर बनाके जिई ।

निरु चौधरी
बेलौरी-६ कंचनपुर

निरु चौधरी

निरु चौधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

हे भगवान ओइनहे ना परच्वाएउ

पहिले टे सिरिजल, जलथल ढरटी ।सिरिजीटे गइलाहो कुसकही डाभ ।।हुइनाटे मै गल्ती फेन हो सेक्ठुँ । लकिन मही महा अचम्भ लागठ कि यी पृथ्वीके उत्पत्तीके पुरा इतिहास


भाष्कर देव चौधरी

समानता, शिक्षा ओ रोटी

मनै मुअक टे जर्मलक नै हो, बेन जियक टे जर्मलक हो । प्याट केल पालक टे जिना टे संकिर्ण वा घिनलक्टीक विचार हो । अ‍ैसिन घिन लक्टीक विचारह ठाउँ देलसे मनै उन्नतिम


शत्रुधन गोचाली

अपन लइकन सु–संस्कारवान बनाएक जरुरी

समयके गति अपन धुरीमे बहुट तेजीसे आगे बढतबा । एके केउनाई रोक पाई समयके गतिके साथ साथे हर एक चीजमे बहट तेजीसे परिवर्तन हो रहलबा । पहिलेक समय आउर अबके समयमे बहुट


श्याम सिटी