डगर डेखैटी रहो

कविता
डगर डेखैटी रहो

टुँ कबो चहकट रहो
टुँ कबो महकट रहो
टुँ प्रेरणा बनके चमकट रहो
कबु छाइ बनके
कबु बहिनियाँ बनके
कबु प्रेमिका बनके
कबु जीवनजोरिया बनके
खुशीके पानी डरटी रहो
जीवन भरके यि लम्मा सफरमे
डाइ बनके डगर डेखैटी रहो
डाइ बनके डगर डेखैटी रहो ।
कर्मवीर चौधरी
भचकाही, सिरसिया श्रावस्ती उत्तर प्रदेश, भारत

कर्मवीर चौधरी

कर्मवीर चौधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

गजल

पट्ठरहे खुशी पारक लाग फुला चह्राइक् परठ ।ना बोलठ् ना चलठ टबफें शिर झुकाइक् परठ । स्वार्थी समाज स्वार्थी संसार अस्टही बा यहाँ,केकरो चोटमे अपन मन काहे रुवाइक्


वसन्त चौधरी

सुर्खेत ओ दाङके सम्झना

संस्मरण कृष्णपुर गुलरिया कंचनपुरसे थारुनके धरोहर जोगराज चौधरीके नेतृत्वमे वडा नम्बर ३,५,६ केअध्यक्ष क्रमश सुन्दर चौधरी, आशुराम चौधरी, नत्थुराम चौधरी ओ


वीरबदाहुर राजवंशी


वसन्त चौधरी