गजल

गजल

जहर डंगौरा
जान पहिचान, मनैनके जवानी हो ।
जिन्गी सँचमे, समुन्डरके पानी हो ।

मन लग्ना पिना, करठै बहाना मनो,
टेन्सनमे खैना पिना, केकरो बानी हो ।

छोरना बा सब, आइ जब समय टो,
मन चाहे डेहुइया, यहाँक् डानी हो ।

चट्नी मजा डोसरके, घरमे झगरा,
मौजमस्टी बाहेर कर्ना, जानी जानी हो ।

बनलेसे हाइ, नैटो अपन कहके फेन,
केकरो लाग काम करना जमानी हो ।
भजनी–९ पहलवान कैलाली

जहर डंगौरा

जहर डंगौरा

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

गजल

पट्ठरहे खुशी पारक लाग फुला चह्राइक् परठ ।ना बोलठ् ना चलठ टबफें शिर झुकाइक् परठ । स्वार्थी समाज स्वार्थी संसार अस्टही बा यहाँ,केकरो चोटमे अपन मन काहे रुवाइक्


वसन्त चौधरी

सुर्खेत ओ दाङके सम्झना

संस्मरण कृष्णपुर गुलरिया कंचनपुरसे थारुनके धरोहर जोगराज चौधरीके नेतृत्वमे वडा नम्बर ३,५,६ केअध्यक्ष क्रमश सुन्दर चौधरी, आशुराम चौधरी, नत्थुराम चौधरी ओ


वीरबदाहुर राजवंशी


वसन्त चौधरी