गजल

का कमि रहे हेर्ना उ नजर भुलाडेलो ।
साँझके सिटरैना उ नहर भुलाडेलो ।

दुई मुटुके मिलन हुइना गुरही चोकमे,
मोर घरे ओर अइना उ डगर भुलाडेलो ।

टँु मोर मैया प्रेमके बहियाँमे रमैलो,
रात विराट याडके उ पहर भुलाडेलो ।

सर्बत बटाके जहर पिवइना महिन,
मैंया ममतासे हेर्ना उ लजर भुलाडेलो ।

मैंया प्रेमके बरवार जाल रचलो,
कब्बु नै विस्रैना उ शहर भुलादेलो ।
विश्वदेव चौधरी
कैलारी ३ खोनपुर कैलाली

विश्वदेव चौधरी

विश्वदेव चौधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

गजल

पट्ठरहे खुशी पारक लाग फुला चह्राइक् परठ ।ना बोलठ् ना चलठ टबफें शिर झुकाइक् परठ । स्वार्थी समाज स्वार्थी संसार अस्टही बा यहाँ,केकरो चोटमे अपन मन काहे रुवाइक्


वसन्त चौधरी

सुर्खेत ओ दाङके सम्झना

संस्मरण कृष्णपुर गुलरिया कंचनपुरसे थारुनके धरोहर जोगराज चौधरीके नेतृत्वमे वडा नम्बर ३,५,६ केअध्यक्ष क्रमश सुन्दर चौधरी, आशुराम चौधरी, नत्थुराम चौधरी ओ


वीरबदाहुर राजवंशी


वसन्त चौधरी