हसैना बात चित

हसैना बात चित

मनरखना ओ मनरखनीनके आपसमे बातचित हुइति रहिन यहे क्रममे :

मनरखना :- यार दार्लिंग अतरा दिन संगे लेगली घुम्ली मोज करली लेकिन तोहर उमेर बिस्रा दरनु बताईन तोहर ठयाक्रेक्के उमेर कतना हुइल ?

मनरखनी :- भर्खर बिस तो लागता का करे ?

मनरखना :- ये हो जत्तुके ! लेकिन दुइ वर्ष पहिले फोनमे फे बिस वर्ष कहले रहो आझ फे बिस वर्ष कह्तो झुठ !!

मनरखनी :- झुठ नाई हो मई जा बोल्थु सच् किल बोल्थु सचके अलावा कुछ फे नाई बोल्थु का ?

एकथो गाउक लवन्डी ओ सहरिया लवण्डा के बिचमे मैया प्रेमके बार्तालाप हुइति रहथ !यहे क्रममे :

लवण्डा :- लवन्डीके आँखिम हेरती प्रिय मै जबसे तुहिन देख्ले आतु तबसे तोहर आखिम सारा संसार देखे लागल बातु तोहर तारिफ तो जतरा करले से कम हुइथ ?

लवन्डी :- धत् ! गफ देथो खाली

लवण्डा :- गफ नाई हो का मै तोहर आँखिम हमार हुइना वाला बालबच्चाके फोटो देखातु ; तु मोर आँखिम हेरके बताउन मोर आँखिम का देख्ठो ?

लवन्डी :- मै और कुछ नाई बस आँखिक कोन्वमे किच्चर देखातू जे ???

एक बेर धनगढीके पार्कमे एक लाउरा ओ लावारियाके खुब गोप्य बातचित हुइतेहे तब

लाउरा :- अरे यार तु कतरा तर्पोइथो आब्तो हाम्रे जल्दी भोज करली का न नुक्के भेटक परि न कोइ टेन्सन का ?

लावारिया :- ये तबे मरे मिहिन जल्दी जल्दी आऊ कह्तोहो ?

लाउरा :- हा तो प्रिय का करु अब्तो मिहिन किशोर अवस्थाके लक्ष्यण देखाके लभरिया रोग फे लाग गिल बा भोज नाई कार्बो तो मै जल्दी मर्जिम ;;;;

 लावारिया :- मिहिन का पागल सोचले आटो मै तोहर जैसिन रोगिनसे भोज नाई करे सेकम बरु मार जाऊ कोइ मतलब नाई हो ,,,

दिपेन्द्र चौधरी

बौनियाँ ८ कुमारी बाघ कैलाली साभार ओ सुधार दिपेन्द्र चौधरी के अटोसे

 दिपेन्द्र चौधरी

जनआवाजको टिप्पणीहरू

पाछेक साहित्य

‘डुटिया’ ह्यारबेर

जब मनै इ ढरटिम पहिला पैला ट्याकट टबसे वाकर जिनगि जिना संघर्स सुरु हुइट । आपन जिनगि जियक लाग संघर्स कर भिरठ् । संघर्स कर्ना क्रम म समय ओ परिस्ठिटि लेख वाकर


पुनाराम कर्याबरिक्का

गजल

का कमि रहे हेर्ना उ नजर भुलाडेलो ।साँझके सिटरैना उ नहर भुलाडेलो । दुई मुटुके मिलन हुइना गुरही चोकमे,मोर घरे ओर अइना उ डगर भुलाडेलो । टँु मोर मैया प्रेमके बहियाँमे


विश्वदेव चौधरी

गजल

जहर डंगौराजान पहिचान, मनैनके जवानी हो ।जिन्गी सँचमे, समुन्डरके पानी हो । मन लग्ना पिना, करठै बहाना मनो,टेन्सनमे खैना पिना, केकरो बानी हो । छोरना बा सब, आइ जब


जहर डंगौरा