थारु जातिनके संस्कार ओ खानपिन

थारु जातिनके संस्कार ओ खानपिन

थारु जातिनके संस्कार ओ खानपिन
थारु जातिनके संस्कार बहुट बा । थारु जातिनके संस्कार ओ खानपिन परम्परागत रुपमे चल्टी आइल संरचनाके रुपमे रहल बा । मनै सामाजिक प्राणी हुइटैं । समाजमे बैठ्ना समाजमे बह्रना ओ समाजमे अपन जिन्गीक आधारभुत आवश्यकता पुरा कर्ना चहठैं । ओहे कारण थारु समुदायमे परम्पराकालसे अपन समुदायके विकासके लाग सामाजिक काम कर्टी आइल बटैं । थारु जातिमे सबसे पहिल माघ, ढुरहेरी, डस्या, डेवारी लगायत औरे फेन टिहुवार चलन चल्टीमे नन्टी बटैं । टिहुवार अनुसार खानपिनके परिकार फेन टमान किसिमके बनैठैं ।

थारु समुदायमे फरक फरक किसिमके चलन रहल बा । ओस्टके थारु समाजमे छाइनके भोजके लाग छाइनके तर्फसे डमाड खोजना चलन बा । यी काम कर्ना मनैनहे अगुवा कठैं । छाइ ओ छावाके भोज पक्का हुइ टे १६ ठो सुपारी साटा–साटा करके ५ डोनिया टिना, डारु ढोग लागके औरे टौर तरिका फेन यी समाजमे डाइ ओ छावाके भोजके बारेमे पक्का कर्ना चलन बा । डुलाहा सफा कर्ना संगे घरके डेंउटाके पुजा करके ओ गाना गाँके मरुवामे पुजा करके किल छावा औरे गाउँके छाइहे लेहे जइना चलन बा । भोजके समयमे छावा ओ डुलाहा उज्जर लुगाके जामा ओ पगरी लगाके डुलहीहे लेके जइना चलन बा । डोसर दिन साँझके डुलही लेके अइना चलन बा । फेर डुलहीके ओरसे डुलही नन्ना चलन फेन बा । यदि डुलही डुलाहाके घर जाइ लागल टे डुलहीके हाँठमे जहर खोरियामे डेठैं टे जहर पिके मर जाइ टे अभिप्राय हुइठं कहिके काम कर्ना चलन फेन बा । बच्चा जन्मलक ६ दिनमे छठीहार मनैठैं । यी दिन डाइहे चोख्याइना, सोरिनियाके विदा ओ बच्चाके नाउँ ढर्ना चलन फेन बा । ५–६ बरसमे मामासे भुट्ला कटइना चलन फेन थारु समुदायमे बा । डाडु कौनो कारण बस बिटगैल ओकर पाछे डाडुके जन्नीहे भइया लेना चलन फेन बा । यी चलनहे चुरिया घलइना फेन कठैं । छाइके भोज हुइल ओरसे दुध खवइलक बड्लामे पैंसा डेना परचलन फेन बा । थारु जातिमे मौट हुइल समयमे जरैइना ओ भठ्ना चलन फेन बा । थारु समुदायमे बहुट किसिमके संस्कार हुइल ओरसे फरक फरक किसिमसे मनठैं ।

थारु जातिनमे विशेष कैके खाना सयुंक्त रुपमे एक ठाउँ जम्मा होके खाना खइना चलन फेन रहल बा । यी जातिनमे परिवारके आकार छोट रहलेसे फेन सक्कु जाने पूर्ण रुपमे पुरै भाग पैना चलन फेन रहल बा । भात, नोन, मिर्चा ओ दाल हुइल कलेसे बहुट मजासे यी थारु जाति हुँकरे खाना खैठैं । विशेस कैके यी थारु जाति मच्छी, गेंगटा, घोंघी, घोंटा, सुटही, मुसुवा, जाँर डारु आदि यी थारु जातिनके पहिचान सहितके खानपिन एकठो संस्कृतिके अभिन्न एक अंग होसेकल बा । थारु जातिनमे हँुक्का पिना फेन एकठो चलन हो । सामाजिक परिवार संचालनके लाग थारु समुदाय गाउँके सुरक्षाके ओ पहिचानके लाग संस्कार ओ खानपिन जोगैना बहुट जरुरी बा । थारु समुदायके ऐतिहासिक पहिचान डेना संस्कृति संस्कार हेरैटि गैल बा । थारु जातिनमे परम्परागत रुपमे चलटी संरचनाहे संस्थागत कर्र्ना अप्ठ्यारो डेखैटी बा । थारु सामुदायिक विकासके काम कर्टी आइल इतिहास डेखैटी बा । प्रत्येक बरस संस्कार ओ खानपिन माघे संक्रान्तीके दिन सक्कु गाउँके सहमतले टमान परिकारके खानपिन बनैना चलन सुरु करल बटैं । थारु समुदायमे परम्परमगत रुपमे चल्टी आइल जन्म, मौट, भोज, पुजापाट, खेतिपाती, टिहुवार, पहिरन, लगाम, खानपिन, रहनसहन ओ भाइचारा आदि हुइटी पहिचानके रुपमे रहल बा । यी सक्कु चिज आझकल बदलटी लोप हुइटी जाइटैं । एकर संरक्षण ओ सम्बर्धन कर्ना जरुरी बा । नेपालके संस्कार, खानपिन ओ समुदायके पहिचान नेपालके गौरव बह्रैना फेन जरुरी बा ।
रविता चौधरी

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जनआवाजको टिप्पणीहरू

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