थारु समुदायके लगामसे अन्तरसम्बन्ध

थारु समुदायके लगामसे अन्तरसम्बन्ध

थारु समुदायके लगामसे अन्तरसम्बन्ध
हमार थारु समुदायके लगाम फरक बा । थारु समुदायके जातिय पहिरन बनैना भुमिका बा । हमार थारु जातिनके लगाम टिहुवार अनुसार फेन मेरमेरिक बा । थारु जातिनके लगाम सहितके एकठो सांस्कृतिक अभिन्न अंग बनगैल बा । थारु जातिनके लगाम टिहुवार ओ समुदाय अनुसार फेन फरक फरक बा । पुरुवमे मेचीसे पश्चिम महाकालीसम थारु हुँकनके बसोबास रहल ओरसे लगाममे फरक फरक हुइना स्वाभाविक हो । थारु समुदाय भाषा, सँस्कृति रीतिरिवाज, चालचलन, पहिरन ओ लगाममे धनी मानजाइठ ।

थारु लगाम टमान फरक फरक बा । नेपाल तराईमे पुरुवसे पश्चिममे फैलल ओरसे संस्कार, भाषा, पहिरन ओ लगाम ठाउँ अनुसार फरक हुइटी गैल बा । थारु समुदाय भिट्र टमान भाषिक लवज पहिरन ओ लगाम पाजाइठ । जस्टे डंगुवा थारु, डेसौरी थारु, कठरिया थारु, डेउखरिया आदि बा । ओस्टके थारु समुदायमे पुरुष हुँकरे झल्वा, आसकोट, ढोटी, लगौंटी, टोपी, गम्छा, कोट, बन्दी, हाफपैन्ट, सुरुवाल, पैजामा, कमिज, ओ जन्नी मनै हुँकनके मुजैमुजा, फुर्का जामा, लहंगा, अघरान, चोलिया, गोनियाँ, फरिया आदि । यी थारु जाति हँुकनके तराईके फँटुवाके बासिन्दा हुइलेक ओरसे ढेर जसिन पाटिर ओ हलुक मेरके लुगा लगैठैं । ओस्टके थारु जातिनमे जन्नी मनै सिंगारके रुपमे लगैना नठुनी, माला, मुन्द्री, बाजु, चुरिया, टरकी, फोंफी, बुलाकी, पैंची, नठनी, बुलाकी, फुली, सेहेरी, कानसेरी, टौंक, सुटिया, हुमेल गटिया, ठोसिया, लल्हार मेटिकाली, मागैंरा, बिन्डीयाँ, पछेला, टरिया, झुम्का, ठम्की, बिजायटी, जोसम, बाँक, फुलरा, बुलाकी, लुरकी, कानफुली, बिर, बुन्डाल, कुन्डाल, छाटहाटर, बिजुलीवाल, गलचुम्मी, कारा, पाइल, चुरुवा, मुजरा, छारा, बिछुवा आदि टमान मेरके थारु जातिनके गरगहना बा ।

थारु समुदायमे सुरुक् युग थारुनके अपन छुट्टे परिचय, पहिरन ओ लगाम बा । काहे की मनै जीवनके सक्कु अवधीसे अल्प अवधीके किल लिखित विवरण प्राप्त बा । उहे युगके थारु हँुकनके महिमा ओ क्रियाकलाप थारु समुदायके पहिरन ओ लगाम हो । पुर्खनके पालासे चल्टी आइल यी टमान पहिरन ओ लगाम बा । थारु समुदायके समाज विकास हुइबेर पहिरन ओ लगामके सबसे ढेर भुमिका रहिन । पहिरन ओ लगाम थारु समुदायके जातिय संस्कार, संस्कृति बचैले बा । थारु समुदमय, विश्वव्यापीकरण, आधुनिकिकरण, राज्यके नीतिनियमसे सबसे ढेर पीडित बा । अपन समाजके संस्कार, संस्कृतिक महत्व, पहिरन ओ लगाम बुझे नैसेक्के लगाममे परिर्वतन हुइ लागल बा । कोइ कहे नैसेक्ठैं । की थारु समुदायके पहिरन ओ लगाम का हो । लावा अनुसार युवा, पिढि, अपनहे थारु समुदायके पहिरन ओ लगाम बिसरैटी जाइटैं ।

धार्मिक विचलन आके फरक फरक लगाम अपनाइ लागल बटैं । थारु समुदायके समाजिक, सांस्कृतिक विकास, पहिरन ओ लगाम चलन चल्टीमे लन्टी रना कैके सक्कु जाने बिसराइ लागल बटैं । हमार थारु समुदायमे आझ अपन पहिचान, पहिरन ओ लगामके लाग लरटी थरुहट क्षेत्रमे अपन पहिचरन ओ लगाम पुर्खासे चल्टी अइलक सामाजिक परम्परा, संस्कार, संस्कृतिहे बचैबी कहटी थरुहटके पहिचान, पहिरन ओ लगाम खोज्टी रटै टे हमार पहिरन ओ लगाम बचाइ सेक्टैं । हम्रे रहब, हमार थारु समाज रहि, हमार थरुहट रहि, हमार पहिरन ओ लगाम रही । हमार थारु जातिनके पहिरन ओ लगाम बचैनामे अभियान चलाइ सक्कु थारु गाउँबासी हुँकरे ।
रविता चौधरी

रविता चौधरी

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जनआवाजको टिप्पणीहरू

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